अच्छा ताजिर
1.हज़रत अबु सईद رضي الله عنه ने कहा कि सरकार ए अक़दस “ﷺ” ने फ़रमाया कि :- *बहुत सच्चे और दयानतदार ताजिर (का हश्र) नबियों , सिद्दिक़ों और शहीदों के साथ होगा* ।
📚तिर्मिज़ी शरीफ , जिल्द 1 ,सफ़ा 229
📚मिश्कात शरीफ , सफ़ा 243
📚अनवारुल हदीस, सफ़ा 289
2. *हदीस शरीफ़*:- हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया कि क़यामत के दिन (बद दयानत)ताजीरों का हश्र नाफ़रमानों के साथ होगा मगर जो ताजिर ख़ुदा ए तआला से डरते हुए हराम से बचे , झूठी क़सम न खाए और सच बोले (तो उसका हश्र फाजीरों के साथ नहीं होगा)
📚तिर्मिज़ी शरीफ , जिल्द 1,सफ़ा 230
📚इब्ने माज़ा ,जिल्द 1 ,सफ़ा 155 ,
📚 मिश्कात शरीफ , सफ़ा 244
📚अनवारुल हदीस, सफ़ा 289
3⃣ *हदीस शरीफ़*:- जो शख़्स ऐबदार चीज़ बेचे और उसके ऐब को ज़ाहिर न करे वह हमेशा अल्लाह तआला की ग़जब में रहेगा और फरिश्ते उस पर लाअनत करते रहेंगे ।
📚इब्ने माज़ा, जिल्द 2,सफ़ा 162
📚मिश्कात शरीफ , सफ़ा 249
📚अनवारुल हदीस , सफ़ा 289
➡मुर्दार की चर्बी को बेचना या उस से किसी क़िस्म का नफ़ा उठाना जायज़ नहीं। न उसे चिराग़ में जला सकते हैं न चमड़ा पकाने के काम में ला सकते हैं ।
📚बहार ए शरीअत, हिस्सा 11 ,सफ़ा 90
📚अनवारुल हदीस, सफ़ा 290
➡काफ़िर हरबी के हाथ मुर्दार की चर्बी और चमड़ा बेचना जाइज़ है ।
📚बहार ए शरीअत , हिस्सा 11, सफ़ा 153
📚अनवारुल हदीस, सफ़ा 290
➡बाअज़ लोग गाय बकरी बटाई पर दे देते हैं कि जीतने बच्चे पैदा होंगे दोनों निस्फ़ निस्फ़ लेंगे *ये इजारह फ़ासिद और नाजायज़ है*। बच्चे उसी के हैं जिस की गाय और बकरी है दूसरे को सिर्फ़ उस के काम की वाजीबी उजरत मिलेगी ।
📚बहार ए शरीअत , हिस्सा 14 ,सफ़ा 140
📚अनवारुल हदीस, सफ़ा 290
➡किसी को मुर्गी दी कि जितने अंडे देगी दोनों निस्फ़ निस्फ़ तक़सीम कर लेंगे ये इजारह भी फ़ासिद और नाजायज़ है ,अंडे उसी के हैं जिस की मुर्गी है ।
📚बहार ए शरीअत , हिस्सा 14,सफ़ा 140
📚अनवारुल हदीस, सफ़ा 290
➡किसी चीज़ की क़ीमत ज्यादा मांगना फिर उस से कम मांगना फिर उस से कम पर दे देना जायज़ है । ये झुट में दाख़िल नहीं है।
📚अनवारुल हदीस, सफ़ा 290
✒✒मिन जानिब :- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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