अजनबी औरत के साथ तन्हाई
1️⃣हज़रत जाबिर رضی اللہ تعالٰی عنہ ने कहा कि हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया:- *ख़बरदार! कोई मर्द किसी सिबा यानी शादी शुदा औरत के पास रात ना गुज़ारे मगर सिर्फ़ इस हालत में की वह मर्द या तो उस औरत का शौहर हो या उसका महरम।*
2️⃣हज़रत उमर رضی اللہ تعالٰی عنہ से रिवायत है कि हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया कि:- *कोई मर्द किसी अजनबी औरत के साथ तन्हाई में नहीं जमा होता लेकिन इस हाल में की वहां दो के अलावा तीसरा शैतान भी होता है।*
3️⃣हज़रत उक़बा बिन आमिर رضی اللہ تعالٰی عنہ से रिवायत है कि हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया:- *तुम (ग़ैर)औरतों के पास जाने से बचो, एक अंसारी ने अर्ज़ किया या रसूलल्लाह “ﷺ”! अगर वह औरत का देवर हो तो फ़रमाया देवर तो मौत है यानी वह और भी ख़तरनाक है।*
4️⃣हज़रत अनस رضی اللہ تعالٰی عنہ से रिवायत है कि हुज़ूर “ﷺ” अपनी एक बीवी के हमराह थे इतने में एक शख़्स सामने से गुज़रा हुज़ूर “ﷺ” ने उसको बुला कर फ़रमाया ऐ फलां! सुन ले कि ये औरत मेरी फलां बीवी है। वो शख़्स बोला या रसूलल्लाह “ﷺ”! जब मैं किसी के साथ बदगुमानी नहीं करता معاذاللہ आप के साथ बदगुमानी करूंगा।
सरकारे अक़दस “ﷺ” ने फ़रमाया बात दरअस्ल ये है कि शैतान इंसान के बदन के अंदर खून की नालियों में दौड़ता फिरता है इसलिए की ये अंदेशा कुछ बइद नहीं कि वह तेरे दिल में वसवसा डाल दे कि रसूले ख़ुदा एक अजनबी औरत के साथ हैं।
➡️अजनबिया औरत के साथ ख़ल्वत यानी दोनों का एक मकान में तन्हा होना हराम है। हाँ अगर वह बिल्कुल बूढ़ी है कि शहवत के क़ाबिल ना हो तो ख़ल्वत हो सकती है।
📚बहार ए शरीअत, हिस्सा 16, सफ़ा 81
➡️महारिम के साथ ख़ल्वत जाइज़ है यानी दोनों एक मकान में तन्हा हो सकते हैं मगर रजाई बहन और सास के साथ तन्हाई जाइज़ नहीं जबकि ये जवान हों। यही हुक्म उस जवान लड़की का है जो दूसरे शौहर से है।
📚बहार ए शरीअत, हिस्सा 16, सफ़ा 81
📚अनवार उल हदीस, सफ़ा 278-279
✒️✒️मिन जानिब:- इल्म की रौशनी
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Ajnabee Aurat Ke Sath Tanhai
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