अक़ीके का गोश्त दादा दादी और नाना नानी के लिए नाजाइज़ समझना कैसा है?
➡ *कुछ लोग अक़ीके का गोश्त दादा दादी और नाना नानी के लिए खाने को नाजाइज़ ख्याल करते हैं यह बहुत बड़ी जहालत नादानी और ग़लत फ़हमी है। अक़ीके का गोश्त दादा दादी और नाना नानी के लिए खाना बिला शुबा जाइज़ है बल्कि जहाँ इस खाने को बुरा जानते हों वहाँ उनके लिए खाना ज़रूरी है।*
अगर वह खायेंगे तो रिवाज़ मिटाने का सवाब पायेंगे।
आला हज़रत इमामे अहले सुन्नत मौलाना अहमद रज़ा खाँ رضي الله عنه से इस बारे पूछा गया तो फ़रमाया:- सब खा सकते हैं उकूदुद दरिया में है :-
احكامهااحكام الا ضحية -
📚अलमलफूज़, हिस्सा 1, सफ़ा 46
📚ग़लत फ़हमियां और उनकी इस्लाह, सफ़ा 127
✒✒मिन जनिब:- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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Aqeeke Ka Gosht
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