औरत का कफ़न मायके वालों के ज़िम्मे लाज़िम जानना
ये एक ग़लत रिवाज है यहाँ तक कि बाअज़ जगह मायके वाले अगर नादर मुफ़लिस हों तब भी औरत का कफ़न उनको देना ज़रूरी ख़याल किया जाता है और उनसे जबरदस्ती लिया जाता है, और उन्हें ख़्वाह माखवाह सताया जाता है हालांकि इस्लाम में ऐसा कुछ नहीं ।
*मसअ्ला* ये है कि मय्यत का कफ़न *अगर मय्यत ने माल छोड़ा हो तो उसी के माल में से दिया जाए और उसने कुछ माल न छोड़ा हो तो ज़िन्दगी में जिस के ज़िम्मे उसका नान व नफक़ा था वह कफ़न दे और औरत के बारे में खास तौर से ये है कि उस ने अगर माल छोड़ा भी हो तब भी उसका कफ़न शौहर के ज़िम्मे है।*
📚फ़तावा रज़वीया, जिल्द 23, सफ़ा 611
📚बहार ए शरीअत , हिस्सा 4, सफ़ा 139
📚ग़लत फहमियाँ और उनकी इस्लाह, सफ़ा 46
✒✒मिन जानिब:- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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Galat Fahmiyan Aur Unki Islah
Maulana Tatheer Ahmad Razvi
ILM KI RAUSHNI
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