बग़ैर बुलाए दावत में जाना कैसा ??
➡ दावत में बग़ैर बुलाए नहीं जाना चाहिए। आज कल आम तौर पर कई लोग दावतों में बिन बुलाए ही चले जाते हैं और उन्हें ना ही शर्म आती है और ना ही अपनी इज्ज़त का कुछ ख़्याल होता है गोया - मान ना मान मैं तेरा मेहमान
*हदिस शरीफ़*
दावत में जाओ जब के बुलाए जाओ
और फ़रमाया
*जो बग़ैर बुलाए दावत में गया वो चोर हो कर दाख़िल हुवा* और ग़ारत गिरी कर के लुटेरे की सूरत में बाहर निकला (यानि गुनाहों को साथ ले कर निकला )
📚अबु दाऊद शरीफ़
जिल्द 3, बाब 127, हदीस नंबर 342, सफ़ा 130
📚करीना ए ज़िन्दगी सफ़ा 84
✒✒ मिन जानिब - मेम्बरान इल्म की रौशनी
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