बेवज़ू अज़ान पढ़ने का मसअ्ला
बेवज़ू अज़ान नहीं पढ़ना चाहिए। लेकिन अगर कोई पढ़ दे तो अज़ान दुरूस्त हो जाती है और उस अज़ान के बाद जो नमाज़ पढ़ी जायेगी वह भी दुरूस्त है। लेकिन बेवज़ू अज़ान पढ़ने की आदत डाल लेना मुनासिब नहीं है।
आला हज़रत फ़रमाते हैं।
“बेवज़ू अज़ान पढ़ना जाइज़ है, बाईं माना कि अज़ान हो जाएगी लेकिन चाहिए नहीं।
📚फ़तावा रज़विया,जिल्द 5, सफ़ा 373
*खुलासा ये कि कभी-कभी बे वज़ू भी अज़ान पढ़ी जा सकती है। लेकिन बेहतर और अच्छा तरीक़ा यही है कि अज़ान बावज़ू पढ़ी जाए।*
📚 ग़लत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह, सफ़ा 139-140
✒✒मिन जानिब:- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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BeWazu Azaan Padhne Ka Masla
Galat Fahmiyan Aur Unki Islah
Maulana Tatheer Ahmad Razvi
ILM KI RAUSHNI
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