दो बे सनद हदीसें
1.हुब्बुल वतनी मीनल ईमान:- वतन की मोहब्बत ईमान से है।
2.जाबेह बकर और कातेअ शजर वाली हदीस यानी जिस हदीस में गाये ज़िबह करने वाले या पेड़ काटने वाले की बख्शिश नहीं बयान किया जाता है।
आला हजरत رضي الله عنه फ़रमाते हैं :-
"वतन की मोहब्बत ईमान का हिस्सा है" न हदीस से साबित है न हरगिज़ उस के यह मअना ।
📚 फ़तावा रज़विया जदीद, जिल्द 15, सफ़ा 292
और फ़रमाते हैं:-
जिबह का पेशा शरअन मम्नूअ नहीं न उस पर कुछ मुवाखिज़ा है अगरचे गाये जिबह करने का पेशा हो वह जो हदीस लोगों ने दरबार-ए-जाबेह बक़र व क़ातिअए शजर बना रखी है महज़ बातिल व मोज़ूअ है।
📚फ़तावा रज़विया जदीद, जिल्द20, सफ़ा 250
खुलासा ये की वतन से मोहब्बत करना फितरत का तक़ाज़ा है और अच्छी बात है, लेकिन इस सिलसिले में जो हदीस बयान की जाती है वह बे सनद व बे असल है। और गाये जिबह करना जहां क़ानूनन ज़ुर्म हो तो उलमा ने वहां उस से बचने का मशवरा दिया है।
📚ग़लत फ़हमियां और उनकी इस्लाह ,सफ़ा 155
✒✒मिन जनिब:-मेम्बरान इल्म की रौशनी
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Do Besanad Hadeesein
Hubbul Watani Minal Iman
Galat Fahmiyan Aur Unki Islah
Maulana Tatheer Ahmad Razvi
ILM KI RAUSHNI
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