Ek Mahine Ke Rozon Se Behtar

जिहाद के फ़ज़ाइल

एक महीने के रोज़ों से बेहतर


सैय्यदना हज़रत सलमान رضي الله عنه‎‎ फ़रमाते हैं मैंने मुस्तफ़ा जाने रहमत हुज़ूर “ﷺ” को फ़रमाते हुए सुना 
एक दिन खुदा की राह में इस्लामी सरहद की हिफाज़त करना एक महीने के रोज़ों और क़याम से बेहतर है और अगर उसी में फौत हो जाए तो जिस अमल में मसरूफ़ था वह उसी पर जारी कर दिया जाता है और इस पर उसको रिज़्क़ जारी कर दिया जाता है । और फितना से महफूज़ हो जाता है ।

हज़रत फ़ज़ाला बिन उबैद  رضي الله عنه‎‎ से मरवी है रसूल ए अकरम हुज़ूर “ﷺ” ने इरशाद फ़रमाया *हर मय्यत का अमल ख़त्म हो जाता है लेकिन अल्लाह तआला के रास्ते में इस्लामी सरहद की हिफाज़त करने वाले का अमल क़यामत तक जारी रहता है।*

📚रियाजुस सालिहिन
📚फैज़ान ए शरीअत, सफ़ा 1019 -1020

✒✒मिन जानिब:- मेम्बरान इल्म की रौशनी 

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Jihad Ke Fazail

ILM KI RAUSHNI

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