फौतगी(मय्यत) के मौके पर बके जाने वाले कुफ़्रियात कि मिसालें
1. किसी की मौत हो गई इस पर दूसरे शख़्स ने कहा *"अल्लाह तआला को ऐसा नहीं करना चाहिए था"*।
2. किसी का बेटा फौत हो गया , उसने कहा *अल्लाह तआला को ये चाहिए होगा* "ये कौल कुफ़्र है क्योंकि कहने वाले ने अल्लाह तआला को *मोहताज़* करार दिया"।
📚फ़तावा बजाजिया, जिल्द 6, सफ़ा 349
3.किसी की मौत पर आम तौर पर लोग बक देते हैं, "अल्लाह तआला को न जाने इसकी क्या ज़रूरत पड़ गई जो जल्दी बुला लिया" कहते हैं, अल्लाह तआला को भी नेक लोगों की ज़रूरत पड़ती है इसलिए जल्द उठा लेता है। ( *ये सुन कर माना समझने के बावजुद अमूमन लोग हाँ में हाँ मिलाते हैं या ताईद में सर हिलाते हैं उन सब पर हुक्मे कुफ़्र है*)
4. किसी की मौत पर कहा या अल्लाह!ﷻ इसके छोटे छोटे बच्चों पर भी तुझे तरस न आया!
5. जवान मौत पर कहा या अल्लाह!ﷻ इसके भरी जवानी पर ही रहम किया होता! अगर लेना ही था तो फुलां बूढ़े या बुढ़िया को ले लेता ।
6. या अल्लाह!ﷻ आख़िर इसकी क्या ज़रूरत पड़ गई कि अभी से वापस बुला लिया ।
📚28 कलिमाते कुफ़्र, जिल्द 6-7
✒✒मिन जानिब:- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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