फ़िल्मी गानों की तर्ज़ पर नात शरीफ़ पढ़ना कैसा?
*जवाब :-* आज कल जलसों और मुशायरों में शायर व नआतख़्वां लोग फ़िल्मी गानों की तर्ज़ पर *हम्द,नात व मंक़बत* पढ़ने लगे हैं हालांकि ये मना है ।
उन्हें इन हरकात से बाज़ रहना चाहिए और मुसलमानों को चाहिए कि ऐसे लोगों से हरगिज़ नज़्में ना सुनें ।
*आला हज़रत इमाम अहले सुन्नत फ़रमाते हैं अगर गाने की तर्ज़ पर रागिनी की रिआयत हो तो नापसंद है कि ये अम्र(काम) ज़िक्र शरीफ़ के मुनासिब नहीं* ।
📚फ़तावा रज़वीया , जिल्द 10,क़िस्त 2, सफ़ा 185
📚ग़लत फहमियाँ और उनकी इस्लाह , सफ़ा 98
✒️✒️ मिन जानिब:- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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Galat Fahmiyan Aur Unki Islah
Maulana Tatheer Ahmad Razvi
ILM KI RAUSHNI
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