हज़रत ए बिलाल رضي الله تعالیٰ عنه के अज़ान न देने का वाक़्या सही है या ग़लत?
➡️हजरत ए बिलाल رضي الله تعالیٰ عنه के मुतअल्लिक़ एक वाक़्या बयान किया जाता है कि एक मर्तबा कुछ हज़रात ने उन की अज़ान पर एतराज़ किया वह शीन को सीन कहते हैं हुज़ूर “ﷺ” ने उन को माज़ूल कर दिया और किसी दूसरे साहब ने अज़ान दी तो सुबह न हुई जब अज़ान हज़रत ए बिलाल ने दी तब सुबह हुई।
यह वाक़्या बे असल व मनगढ़ंत है मुस्तनद व मोअतबर हदीस व तारीख़ की किताबों में इसका कोई नाम व निशान कहीं नहीं है।जो साहब बयान करें उन से मालूम करना चाहिए कि उन्होंनें यह वाक़्या कहाँ देखा है।
और यह हदीस कि रसूल “ﷺ” ने फरमाया :-
बिलाल की सीन भी अल्लाह के नज़दीक शीन है।
इस हदीस को हज़रत मौलाना अली कारी मक़्क़ी रहमतुल्लाहि तआला अलैहि ने मौजू व मनगढ़ंत कहा है।
📚मौज़ूआत ए कबीर, सफ़ा 43
📚फतावा बहरूल उलूम, जिल्द 5, सफ़ा 380
बल्कि हज़रत अल्लामा शैख़ ताहीर पटनी رحمۃ اللہ علیہ ने सयदिना बिलाल رضي الله عنه के बारे में यहां तक तहरीर फ़रमाया है :- हज़रत बिलाल رضي الله عنه बलन्द आवाज़ ख़ुशगुलू और फ़सिह ज़बान वाले थें। अगर आपकी ज़बान में तुतलापन होता तो कसरत के साथ मनक़ूल भी होता और मुनाफ़िकिन भी इस को बतौर ऐब बयान करते।
📚तज़किरतुल मौज़ुआत, जिल्द 1, सफ़ा 101
इस से मालूम होता है कि ये वाक़्या अहादिस की मुसतनद किताबों में कहीं नहीं। हक़ीक़त ये है हज़रत बिलाल رضي الله عنه निहायत बलन्द आवाज़ और ख़ुशगुलू थें।
📚ग़लत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह, सफ़ा 145,146
➡️ *अगर किन्हीं हज़रात को इस बात पर एतराज़ है तो बराए मेहरबानी इसके सही होने की दलील क़ुतबे अहादिस की रौशनी में हमें एनायत करें*
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Hazrat E Bilal Radiallahu Taala Anhu Ke Azaan Na Dene Ka Waqya Sahi Ya Galat?
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