हज़रत हलीमा का इस्लाम और विसाल
इब्ने हजर ने बयान किया कि हज़रत हलीमा सादिया अपने शौहर और बच्चों के साथ दौलत ए इस्लाम से मशरर्फ हुए।
और मदीना ए तैयबा में विसाल हुआ और जन्नत उल बक़ी में मदफ़न हुए। उनकी क़ब्र शरीफ मशहूर है जिस की ज़ियारत की जाती है ।
📚सीरत ए नबवी, सफ़ा 55
✒✒मिन जानिब:- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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