इस्लाह ए मुआशरा में औरतों का किरदार
मुआशरा की तामीर और तरक़्क़ी में औरतों का रोल भी बहुत अहम है औरतें शख़्सीयत और मुआशरा दोनों की मेअमार हैं।
हदीस ए पाक में आया औरतें रियासत का सूतुन (खम्भा) हैं अगर वह अच्छी हैं तो रियासत भी अच्छी होगी और अगर वह ख़राब हैं तो रियासत भी ख़राब होगी। इस्लामी सोसाइटी के फ़रोग़ व इरतक़ा और तहफ़ुज़ व बक़ा में इस्लाम की मुक़दस ख़वातीन के जो कारहा ए नुमायां तारीख़ के सीनों में महफ़ूज़ हैं उन से सिर्फ़ नज़र मुम्किन नहीं माज़ी और हाल के मुवाज़ना से ये बात और निखर कर सामने आ जाती है कि सिन्फ़े नाज़ुक की शक्ल में लिपटा हुआ वजूद अपने आप में ताक़त व क़ुवत का एक हिमालिया है,औरतों के एख़लाक़ व आमाल और किरदार व गुफ़तार का भरपूर असर समाज पर पड़ता है, ये बताने की चन्दां ज़रूरत नहीं कि इंसान की सब से पहली तरबीयत गाह मां की गोद है वहां से जैसी अख़लाक़ी तरबीयत और फ़िक्री बसीरत इन्सानी ज़ेहनो दीमाग़ में मुनतक़ील होती है वही मुआशरा की तामीर व तख़रीब की असास बनती है मसलन माज़ी में जब माँएं इज़्ज़तदार, रास्त बाज़, हुक़ुक़ व फ़राइज़ की रिआयत करने वाली, क़ुरआन की तिलावत और ज़िक्र व तसबीह से क़ुलुब को मुअत्तर रखने वाली, अख़लाक़ ए हसना की पैकर और शर्म व हया की मुजस्समा हुआ करती थीं तो बच्चे दिन के मुजाहिद और रात के आबिद हुआ करते थे, उन के ख़ून में ईमानी हरारत और दिलो दिमाग़ में इस्लामी ग़ैरत हुआ करती थी मगर जब माँ जहालत की देवी, शर्मो हया से आरी और हुक़ुक़ व फ़राइज़ से ग़ाफ़िल, नाविल, अफ़साना, गाना, टी वी, सिनेमा, यु ट्यूब, इंस्टाग्राम और सोशल मीडिया की दिलदादह बन गई उस वक़्त से उस की गौद में परवरिश पाने वाले बच्चे मुआशरा के लिए बद नुमा दाग़ होने लगे हैं। इस मुआज़नाती जायज़ा से पता चलता है कि इस्लाह ए मुआशरा में औरतें भी अहम किरदार अदा कर सकती हैं इस लिए इस्लाम की इज़्ज़त दार ख़वातिन से आजिज़ाना गुज़ारिश है कि वह अपने मक़ाम व मनसब, ताक़त व क़ुवत और हैसियत के मुताबिक़ मुआशरा को पाकिज़ा और समाज को ख़ुशगवार बनाने की कोशिश करें, इन की जिम्मेदारी इस एतबार से और बढ़ जाती है कि समाज में बहुत सारी बुराइयां सिर्फ़ औरतों की अंधी अक़ीदत और जाहिलाना रस्मो रिवाज से मुतासिर होने की वजह से बढ़ रही हैं जिनको मिटाने में औरतें नुमाया किरदार अदा कर सकती हैं इसलिए अपने तौर पर हत्तल मक़दूर कोशिश करके आख़िरत में सुरखरुई हासिल करें।
अर्ज़ गुज़ार
✍🏻✍🏻 अब्दुल मलिक मिस्बाही, ग्लोबल 20 न्यूज़ चैनल व बानी दारैन अकैडमी जमशेदपुर.
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✒️✒️मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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