Itikaf Ka Bayan Part 1( Qanoon E Shariat)

एतकाफ़ का बयान

पार्ट 1

हदीस शरीफ़ :-


 रमज़ान में दस दिनों का एतकाफ़ कर लिया तो ऐसा है जैसे दो हज और दो उमरे किए।

📚 बहार ए शरीअत

➡️ एतकाफ़ की नियत से अल्लाह के वास्ते मस्जिद में ठहरने का नाम एतकाफ़ है।
एतकाफ़ तीन (3) क़िस्म का है....

1️⃣ वाजिब
2️⃣ सुन्नत ए मुअकिदा
3️⃣ मुस्तहब

➡️ *एतकाफ़ ए वाजिब :-*  ये नज़्र का एतकाफ़ है जैसे किसी ने ये मन्नत मानी कि फ़लां काम हो जाएगा तो मैं एक (1) दिन या दो (2) दिन का एतकाफ़ करुंगा, तो ये एतकाफ़ वाजिब है। इसका पूरा करना ज़रूरी है एतकाफ़ वाजिब के लिए रोज़ा शर्त है बग़ैर रोज़ा के सही नहीं। 

➡️ *एतकाफ़ ए सुन्नत ए मुअकिदा :-* ये रमज़ान के पूरे अशरा आख़िरा यानी आख़िर के दस (10) दिन में किया जाए। यानी बीसवें (20)  रमज़ान को सूरज डूबते वक़्त एतकाफ़ की नियत से मस्जिद में मौजूद हो और तीसवें (30) को सूरज डूबने के बाद या उनत्तिसवें (29) को चांद होने के बाद निकले। अगर बीसवें (20) तारीख़ को बाद नमाज़ ए मग़रीब एतकाफ़ की नियत की तो सुन्नत ए मुअकिदा अदा ना होगी। ये एतकाफ़ सुन्नत ए मुअकिदा कफ़ाया है। कि अगर सब छोड़ दें तो सब पकड़े जाएंगे और अगर एक ने भी कर लिया तो सब छुट जाएं। इस एतकाफ़ में भी रोज़ा शर्त है। मगर वही रमज़ान के रोज़े काफ़ी हैं।

➡️ *एतकाफ़ ए मुस्तहब :-* एतकाफ़ ए वाजिब और एतकाफ़ ए सुन्नत ए मुअकिदा के अलावा जो एतकाफ़ किया जाए वो मुस्तहब है। एतकाफ़ ए मुस्तहब के वास्ते रोज़ा शर्त नहीं ये थोड़ी देर का भी हो सकता है। मस्जिद में जब जब जाए उस एतकाफ़ की नियत कर ले चाहे थोड़ी ही देर मस्जिद में रह कर चला आए। जब चला आएगा एतकाफ़ ख़त्म हो जाएगा। नियत में सिर्फ़ इतना काफ़ी है कि मैंने ख़ुदा के वास्ते एतकाफ़ ए मुस्तहब की नियत की।

📚क़ानून ए शरीअत, हिस्सा 1, सफ़ा 213 - 214

🟣 आगे जारी रहेगा.....

✒️✒️मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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Itikaf Ka Bayan Part 1( Qanoon E Shariat)
Etikaf Ka Bayan Part 1( Bahar E Shariat)

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