एतकाफ़ के चन्द मसाइल
पार्ट 2
1️⃣ मर्द के एतकाफ़ के लिए मस्जिद ज़रूरी है और औरत अपने घर की उस जगह में एतकाफ़ करे जो जगह उसने नमाज़ के लिए मुक़र्रर की हो।
2️⃣ मुत्तकिफ़ (यानी एतकाफ़ करने वाला) को मस्जिद से बग़ैर उज़्र निकलना हराम है अगर निकला तो एतकाफ़ टूट जाएगा चाहे भूल कर ही निकला हो जब भी। यूँही औरत अगर अपने एतकाफ़ की जगह से निकली तो एतकाफ़ जाता रहेगा चाहे घर ही में रहे। और मस्जिद से निकलने के दो उज़्र हैं एक तबई दूसरा शरई!
*तबई उज़्र* यह है जैसे पाख़ाना, पेशाब, इस्तिन्जा फ़र्ज़ ग़ुस्ल वज़ू (जबकि ग़ुस्ल व वज़ू की जगह मस्जिद में ना बनी हो मस्जिद में बड़ा हाउज़ न हो)।
*शरई उज़्र* यह है कि जैसे ईद या जुम्मा की नमाज़ के लिए जाना। अगर एतकाफ़ वाली मस्जिद में जमाअत न होती हो तो जमाअत के लिए भी जा सकता है। इन उज़रों के सिवा किसी और वजह से अगर थोड़ी देर के लिए भी एतकाफ़ की जगह से बाहर जाएगा तो एतकाफ़ जाता रहेगा अगरचे भूल ही कर जाए।
3️⃣ मुत्तकिफ़ रात दिन मस्जिद ही में रहे वहीं खाए, पीए, सोए इन कामों के लिए मस्जिद से बाहर होगा तो एतकाफ़ टूट जाएगा।
4️⃣ मुत्तकिफ़ के सिवा और किसी को मस्जिद में खाने, पीने, सोने की इजाज़त नहीं। और अगर यह काम करना चाहे तो एतकाफ़ की नियत करके मस्जिद में जाए और नमाज़ पढ़े या ज़िक्र ए इलाही करे फ़िर यह काम कर सकता है। मगर खाने पीने में यह ऐहतियात लाज़िम है कि मस्जिद आलुदा (गन्दा) न हो।
5️⃣ मुत्तकिफ़ को अपनी ज़रूरत या बाल बच्चों की ज़रूरत से मस्जिद में ख़रीदना या बेचना जायज़ है जबकि वह चीज़ मस्जिद में न हो या हो तो थोड़ी हो कि जगह न घेर ले। और अगर ख़रीद व फरोख़्त तिजारत की नियत से हो तो नाजायज़ है चाहे वह चीज़ मस्जिद में ना हो जब भी।
6️⃣ मुत्तकिफ़ ना चुप रहे ना बात करे बल्कि क़ुरआन शरीफ़ की तिलावत हदीस की क़िराअत और दुरुद शरीफ़ की कसरत करे वा इल्म ए दीन का दर्सो तदरीस करे अम्बिया, व औलिया व सालेहीन के हालात पढ़े या दीनी बाते लिखे।
7️⃣ अगर नफ़्ल एतकाफ़ तोड़ दे तो उसकी क़ज़ा नहीं और सुन्नत ए मुअकिदा एतकाफ़ अगर तोड़ा तो जिस दिन तोड़ा फ़क़्त उस एक दिन की क़ज़ा पूरी दस दिनों का क़ज़ा वाजिब नहीं, और मन्नत का एतकाफ़ तोड़ा तो अगर किसी मुक़र्रर महीना की मन्नत थी तो बाक़ी दिनों की क़ज़ा करे वरना अगर अललइत्तेसाल वाजिब हुआ था तो सिरे से फ़िर से एतकाफ़ करे और अगर अललइत्तेसाल वाजिब ना था तो बाक़ी का एतकाफ़ करे।
8️⃣ एतकाफ़ जिस वजह से भी टूटे चाहे क़सदन या बिला क़स्द बहर हाल क़ज़ा वाजिब है।
📚क़ानून ए शरीअत, हिस्सा 1, सफ़ा 214 - 215
🟣 *तफ़सील से जानने के लिए बहार ए शरीअत जिल्द 1, हिस्सा 5 का मुताअला करें।*
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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