Jaanwaron Se Unki Taqak Se Zyada Kaam Lena Kaisa Hai?

जानवरों से उनकी ताक़त से ज़्यादा काम लेना कैसा है?


आजकल आमतौर से लोग इस बात का ख़्याल नहीं रखते। जानवरों पर उनकी ताक़त से ज़्यादा बोझ लाद देना और मार मार कर उन्हें चलाना, ज़ुल्म है। यूँ ही उन बेज़ुबानों के चारा पानी और गर्मी व जाड़े की फिक्र न करना भी ज़ुल्म है। दूध देने वाले जानवरों का सारा दूध खींच लेना और फिर उसके बच्चे को दिन दिन भर के लिए भूका प्यासा रखना ज़ुल्म है। ऐसा करने वाले ज़ालिम हैं और ये ज़्यादा कमाई और आमदनी के लिए ये सब करते हैं। लेकिन कमाने के बाद भी ऐसे लोग परेशान रहते हैं और उन्हें ज़िन्दगी में सुकून मयस्सर नहीं आता और हमेशा बेचैन व परेशान रहते हैं।
*सदरुश्शरीआ हज़रत मौलाना अमजद अली साहब अलैहिर्रहमा फ़रमाते हैं* :-जानवर से काम लेने में ज़रूरी है कि उसकी ताक़त से ज़्यादा काम न लिया जाये। बाज़ यक्का और तांगे वाले इतनी ज़्यादा सवारियाँ बिठाते हैं कि घोड़ा मुसीबत में पड़ जाता है, यह नाजाइज़ है।
जानवर पर जुल्म करना, ज़िम्मी काफ़िर पर जुल्म से ज़्यादा बुरा है और ज़िम्मी काफिर पर ज़ुल्म मुसलमान पर ज़ुल्म करने से भी ज़्यादा बुरा है। क्यूंकि जानवर का कोई मुईन व मददगार अल्लाह तआला के सिवा नहीं। इस गरीब को इस ज़ुल्म से कौन बचाए ।
📚 बहार ए शरीअत ,हिस्सा 16 सफ़ा 258
📚ग़लत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह, सफ़ा 131
✒️✒️ मिन जानिब :- मेम्बरान इल्म की रौशनी

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Jaanwaron Se Unki Taqak Se Zyada Kaam Lena Kaisa Hai?

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