ख़ुतबह् की अज़ान कहाँ दी जाए ?
▶ *हदीस शरीफ़* :- जब हुज़ूर “ﷺ” *जुमआ के दिन मिम्बर पर तशरीफ़ रखते तो हुज़ूर “ﷺ” के सामने मस्जिद के दरवाज़ा पर अज़ान होती* । और ऐसा ही हज़रत ए अबूबक्र व उमर رضی اللہ تعالیٰ عنہما के ज़माने में भी राइज था।
📚अबु दाऊद, जिल्द 1,सफ़ा 155
📚अनवार उल हदीस ,सफ़ा 171
इस *हदीस शरीफ़* से मालुम हुआ कि *ख़ुतबह् की अज़ान* मस्जिद के बाहर पढ़ना सुन्नत है।
हुज़ूर सय्यद ए आलम “ﷺ” और हज़रत ए अबूबक्र व उमर رضی اللہ تعالیٰ عنہما के ज़माने मुबारक में *ख़ुतबह्* की अज़ान *मस्जिद के बाहर* ही हुआ करती थी ।
इस लिए फुक़्हा ए कराम *मस्जिद के अंदर अज़ान देने को मना* फ़रमाते हैं ।
जैसा कि
📚फ़तावा क़ाज़ी खां ,ज़िल्द 1 ,सफ़ा 78
📚फ़तावा आलमगीरी ,जिल्द 1 ,सफ़ा 55
में है *मस्जिद के अंदर अज़ान देना मना है*।
और
📚फ़तावा अल हिन्दीया, जिल्द 1, सफ़ा 55
📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 3, सफ़ा 469 में है कि *अज़ान मीनार पर कही जाए या ख़ारिज ए मस्जिद और मस्जिद में अज़ान न कहे,मस्जिद में अज़ान कहना मकरुह है, ये हुक्म हर अज़ान के लिए है, फ़िक़्हा की किसी किताब में कोई अज़ान इस से मुसतस्ना नहीं, अज़ान ए सानी जुम्आ भी इसी में दाख़िल है*
और
📚क़ानून ए शरीअत, हिस्सा 1, सफ़ा 102
📚फ़तह उल क़दीर ,जिल्द 1,सफ़ा 215 में फुक़्हा ए किराम ने फ़रमाया की *मस्जिद में अज़ान न दी जाए*।
और
📚फ़तह उल क़दीर ,जिल्द 2,सफ़ा 29, ख़ास बाब जुमआ में है
अज़ान हुदूद ए मस्जिद में अल्लाह तआला का ज़िक्र है इसलिए कि वह दाख़िले मस्जिद मकरूह है।
📚अनवार उल हदीस ,सफ़ा 171
➡ *लिहाज़ा* ये जो रिवाज हो गया है कि *अज़ान मस्जिद के अंदर दी जाती है ये ग़लत है*।
मुसलमानों को चाहिए कि इस ग़लत रिवाज को तर्क करें और हदीस व फ़िक़्ह पर अमल करें।
📚अनवार उल हदीस, सफ़ा 171
➡ *और ज़्यादा तफ़सिल से जानने के लिए बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 3 को पढ़ें या औलमा ए अहले सुन्नत से राबता करें*
✒✒मिन जानिब :- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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