Kunde Ka Fatiha

कुंडे का फ़ातिहा


🔴सवाल:- कुंडे क्या है?

🟢जवाब:- *हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ رضي الله عنه‎‎ के इसाल ए सवाब के लिए नियाज़ करने को कुंडे कहा जाता है।*
📚 रजब उल मुरज्जब की बहारें, सफ़ा 16

🔴सवाल:- कुंडे की नियाज़ कब की जाए?

🟢जवाब:- *पूरे माहे रजब में बल्कि पूरे साल में जब चाहें इसाल ए सवाब के लिए कुंडे की नियाज़ की जा सकती है, अलबत्ता बेहतर ये है कि ये नियाज़ 15 रजब को की जाए क्योंकि हज़रत इमाम जाफर सादिक़ رضي الله عنه‎‎ का विसाल मुबारक इसी दिन हुआ था।*
📚रजब उल मुरज्ज्ब की बहारें, सफ़ा 16

🔴सवाल:- क्या कुंडे की नियाज़ उसी घर में खाना ज़रूरी है?

🟢जवाब:- *जिस घर में कुंडे की नियाज़ की गई उसी घर में बैठ कर खाना ज़रूरी नहीं, अपने-अपने घरों में भी ले जाकर खाई जा सकती है।*
📚बहार ए शरीअत, जिल्द 3, सफ़ा 643

🔴सवाल:- मुख़्तलिफ़ कहानियां पढ़ना कैसा है?

🟢जवाब:- *दास्तान ए अजीब, लकड़हारे की कहानी, या इस किस्म की कहानियां कुंडे की नियाज़ के मौक़ा पर पढ़ने से इजतेनाब किया जाए, क्योंकि उन किताबों में जो कुछ लिखा है, ये कहीं से साबित नहीं है, बल्कि उन कहानियों की जगह सूरः यासीन शरीफ़, या फ़ातिहा वग़ैरह पढ़ कर इसाल ए सवाब कर दिया जाए।*
📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 3, सफ़ा 643

🔴सवाल:- सहाबा ए किराम का इसाल ए सवाब करना कैसा है?

🟢जवाब:- *हज़रत अल्लामा जलालुद्दीन सुयूती رضي الله عنه‎‎ नक़ल फ़रमाते है कि सहाबा ए किराम رضي الله عنه‎‎ सात दिन तक वफ़ात पा जाने वालों की तरफ से खाना खिलाया करते थे।*
📚रजब उल मुरज्ज्ब की बहारें, सफ़ा 17
📚 फ़तावा अल सुयूती, जिल्द 2, सफ़ा 223

✒✒मिन जानिब:- इल्म की रौशनी

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