क्या औरत फ़ातिहा नहीं पढ़ सकती?
➡ *जवाब* :- फ़ातिहा व इसाल ए सवाब जिस तरह मर्दों के लिए जायज़ है उसी तरह बेला शक औरतों के लिए भी जायज़ है। लेकिन बाज़ औरतें बेला वजह परेशान होती हैं और फ़ातिहा के लिए बच्चों को इधर - उधर दौड़ाती हैं हालाँकि वह ख़ुद भी फ़ातिहा पढ़ सकती हैं। कम अज़ कम अलहमदो शरीफ़ और क़ुलहुवल्लाह शरीफ़ अक्सर औरतों को याद होती है उस को पढ़ कर ख़ुदा ए तआला से दुआ करें कि या अल्लाह इस का सवाब फ़लां-फ़लां - और फ़लां जिस को सवाब पहुंचाना हो उस का नाम ले कर कहें, उस की रूह को अता फ़रमा दे। *ये फ़ातिहा हो गई और बिल्कुल दुरुस्त और सही हो गई*।
📚ग़लत फ़हमीयां और उनकी इस्लाह, सफ़ा 47
✒✒मिन जानिब :- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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Galat Fahmiyan Aur Unki Islah
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