क्या बारह (12)रबी उल अव्वल विलादत की तारीख़ नहीं?
➡ हुज़ूर “ﷺ” की तशरीफ़ आवरी की तारीख़ के बारे में रिवायात मुख़्तलिफ़ हैं रबीउल अव्वल की बारह तारीख़ के अलावा कुछ किताबों में और तारीख़ें भी मज़कुर हैं। यह इसलिए हुआ कि जिस ज़माने में सरकार की तशरीफ़ आवरी हुई उस वक़्त नसब महफ़ूज़ रखने पर तो बहुत ज़ोर दिया जाता था एक आम आदमी भी अपने बाप दादाओं में दस बीस पुश्तों तक के नाम सुना सकता था, लेकिन पैदाइश की तारीख़ लिखने या याद रखने का कोई खास रिवाज न था, यह भी आम तौर से मालूम न था कि बच्चा महबूबे परवरदीगर है जो आप की हर हर बात लिख कर रखी जाती, हर अदा महफ़ूज़ की जाती, बाद में तलाश करने वालों में इख़्तिलाफ़ हो गया कुछ मुहद्दिसीन और मुवर्रिख़ीन की तहक़ीक बारह रबीउल अव्वल के अलावा भी है, लेकिन ज़्यादा तर हज़रात की तहक़ीक़ यही है कि वह बारह रबीउल अव्वल ही है। इमाम अहमद कुस्तुलानी ने सारी रिवायात जमा करने के बाद में बारह रबीउल अव्वल का ज़िक्र फ़रमाया वह लिखते हैं :-
मक्का मुअज़्ज़मा (जिस शहर में हुज़ूर“ﷺ” की विलादत हुई ) वहां के लोगों का अ़मल बारह रबीउल अव्वल पर ही है क्यों कि वह लोग इस दिन उस मकान की ज़ियारत करते हैं जिस में हुज़ूर “ﷺ” की पैदाइश हुई थी।
*और मशहूर यही है कि आप पीर के दिन बारह रबीउल अव्वल को दुनिया में तशरीफ़ लाये*
📚अलमवाहिबुल लदुनिया, जिल्द 1, सफ़ा 142
📚बारहवीं शरीफ़ जलसे और जुलूस, सफ़ा 17,18
✍🏻✍🏻मौलाना तत्हीर अहमद रज़वी बरेलवी
✒✒मिन जानिब :- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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Barahwin Sharif Jalse Aur Juloos
Maulana Tatheer Ahmad Razvi

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