क्या दाहिनी जानिब से इक़ामत कहना जरूरी है?
आज कल ये ज़रूरी ख़्याल किया जाता है कि इक़ामत या तकबीर जो जमाअत क़ायम करने से क़ब्ल मोअज्जिन लोग पढ़ते हैं। उसमें पढ़ने वाला इमाम के पीछे या दाहिनी तरफ हो और बाएं जानिब खड़े होकर तकबीर पढ़ने को ममनू ख़्याल करते हैं ।
हालांकि तकबीर बाएं तरफ से पढ़ना भी मना नहीं है।
सय्यदी आला हज़रत फ़रमाते हैं:-
और इक़ामत की निस्बत भी तआईन जेहत की दाहिनी तरफ हो या बाएं तरफ फ़क़ीर की नज़र से न गुज़री.... हाँ इस क़दर कह सकते हैं कि मोहाज़ात इमाम फिर जानिब रास्त मुनासिब तर है ।
📚फ़तावा रज़वीया, जिल्द 2, सफ़ा 465
खुलासा ये की इमाम के पीछे या दाहिनी तरफ से पढ़ना ज़्यादा बेहतर है लेकिन बाएं तरफ से पढ़ना भी जायज़ है।
और उस नमाज़ में कोई कमी नहीं आती और दाहिनी तरफ को ज़रूरी ख़्याल करना ग़लत फ़हमी है
📚ग़लत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह, सफ़ा 26
✒✒मिन जानिब:- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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