क्या इमाम के लिए मुक़तदियों की नियत करना ज़रूरी है?
➡ *बाअ्ज जगह कुछ नाख्वान्दे जाहिल लोग इमामों को परेशान करते हैं और उन से इमामत की नियत पूछते हैं। हालांकि इमाम के लिए अलग से मुक़्तदियों की इमामत की नियत करने की कोई ज़रूरत नहीं।*
फ़तावा आलमगिरी में है:
والا ما ينوى ماينوى المنفرد ولا يحتاج الى نيت الا ماماة
और इमाम भी वही नियत करेगा जो अकेला आदमी नियत करता है और इमाम को इमामत की नियत की कोई ज़रूरत नहीं ।
📚फ़तावा आलमगिरी जि.1,.बाब 3, फ़स्ल4,.सफ़ा 66
और *ज़बान से नियत के अल्फाज़ अदा करना तो किसी के लिए भी किसी नमाज़ में ज़रूरी नहीं क्योंकि नियत दिल के इरादे का नाम है।*
इस की तफ़सील आप इस किताब में पढ़ सकते हैं:-
*"इमाम और मुक़तदी" में है।*
📚ग़लत फ़हमियां और उनकी इस्लाह, सफ़ा 144-145
✒✒मिन जानिब:- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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Kya Imam Ke Liye Muqtadiyon Ki Niyat Karna Zaroori Hai?
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