Kya Jo Islami Baton Ki Jankari Na Hone Ki Wajah Se Amal Nahi Karte Unki Pakad Hogi Ya Nahi?

क्या जो इस्लामी बातों की जानकरी न होने की वजह से अमल नहीं करते उनकी पकड़ होगी या नहीं ?


➡️ आजकल काफ़ी लोग ऐसे हैं जो दीनी बातों, इस्लामी अकीदों, पाकी, नापाकी, नमाज़ व रोज़ा और ज़कात वगैरह के मसाइल नहीं जानते और सीखने की कोशिश भी नहीं करते और अल्लाह ﷻ व रसूल “ﷺ”ने किस बात को हराम फ़रमाया और किसे हलाल किसे जाइज़ और किसे नाजाइज़ उन्हें इसका इल्म नहीं और न इल्म सीखने की परवाह ,और खिलाफ़े शरअ हरकतें करते हैं। ग़लत सलत नमाज़ अदा करते हैं, लेन देन ख़रीद व फरोख़्त और रहन सहन में मज़हबे इस्लाम के ख़िलाफ़ चलते हैं और उनसे कोई कुछ कहे या उन्हें ग़लत बात से रोके ख़िलाफ़ ए शरअ पर टोके तो वो कहते हैं, हम जानते ही नहीं हैं लिहाज़ा हम से कोई मुआख़ज़ा और सुवाल न होगा और हम बरोज़े कियामत छोड दिए जायेंगे।

यह उन लोगों की सख़्त ग़लतफ़हमी है, सही बात यह है कि
अन्जान ग़लतकारों की डबल सजा होगी, एक इल्म हासिल न करने की और उलमा से न पूछने की और दूसरे ग़लत काम करने की। और जो जानते हैं लेकिन अमल नहीं करते उन्हें एक ही अज़ाब होगा यानी अमल न करने का , इल्म न सीखने का गुनाह उन पर न होगा।

*आजकल आदमी अगर कोई सामान गाड़ियाँ, कपड़े ज़ेवरात खाने पीने की चीज़ ख़रीदे और उसको उस चीज़ के ग़लत व ख़राब या उसमें धोखेबाज़ी का शुबह (शक) हो जाये तो जाँच परख करायेगा, लोगों से मशवरा करेगा, जानकारों को लाकर दिखायेगा, ख़ूब छान फटक करेगा लेकिन इस्लाम के मुआमले में मनमानी करता रहेगा, उल्टी सीधी नमाज़ पढ़ता रहेगा। वुज़ू व , नहाने धोने में इस्लामी तरीक़े का ख़्याल नहीं रखेगा, लेन देन और मुआमलात में हराम को हलाल और हलाल को हराम समझाता रहेगा लेकिन आलिम मौलवियों से मालूम नहीं करेगा कि मैं जो करता हूँ यह ग़लत है या सही?*

 यह इसलिए हुआ कि अब इन्सान को दुनिया के नुक़सान
की तो फ़िक्र है लेकिन आख़िरत के घाटे की कोई फ़िक्र नहीं हालाँकिं वह मौत से किसी सूरत बच न सकेगा और क़ब्र व हश्र व जहन्नम के अज़ाब से भाग निकलना उसके बस की बात न होगी। दुनयवी हुकूमतों और सल्तनतों की ही मिसाल ले लीजिए अगर कोई शख़्स किसी हुकूमत के किसी क़ानून के ख़िलाफ़ वर्ज़ी करे और फ़िर कह दे कि मैं जानता ही नहीं हूँ तो हुक्काम और पुलिस उसकी बात नहीं सुनेंगे और उसे सज़ा दी जाएगी। मिसाल के तौर पर कोई शख़्स बग़ैर लाइसन्स के ड्राइवरी करे या बग़ैर रोड टैक्स  जमा करे गाड़ियाँ और मोटर चलाए और जब पकड़ा जाये तो कहे मुझको पता नहीं था कि गाड़ी चलाने के लिए ये काम करना पड़ते हैं, तो हरगिज़ उसकी बात नहीं सुनी जाएगी। ऐसे ही कोई शख़्स बग़ैर टिकट के रेल में सफ़र करने लगे या पैसेन्जर का टिकट ले और एक्सप्रेस में सफ़र करने लगे, सेकेन्ड क्लास का टिकट लेकर फर्स्ट क्लास में बैठ जाये और जब पकड़ा जाए तो कह दे कि मैं जानता ही नहीं रेल में सफ़र के लिए टिकट लेना पड़ता है या यह एक्सप्रेस है मैं नहीं पहचान सका और यह फर्स्ट क्लास है मुझको नहीं मालूम तो क्या चेक करने वाले उसको छोड़ देंगें ? हरगिज़ नहीं। ऐसे ही दीन के मामले में जो लोग ग़लत सलत करते हैं वो भी यह कहने से नहीं छूटेंगें कि हम जानते ही न थे और क़यामत के दिन उन्हें दोहरी सज़ा होगी, एक न जानने की और दूसरी न करने की। इन सबकी तफ़सील व तहक़ीक़ के लिए देखिए
📚आलाहज़रत अलैहिर्रहमा के फरमूदात अलमलफूज़ हिस्सा अव्वल सफ़ा 27 पर। 
*📚ग़लत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह, सफ़ा 121,122,123*

✒️✒️ मिन जानिब :- मेम्बरान इल्म की रौशनी 

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