क्या मछली और अरहर की दाल पर फ़ातिहा नहीं होगी?
हमारे कुछ अवाम भाई अपनी नावाक़फ़ी की वजह से ये ख़्याल करते हैं कि मछली और अरहर की दाल पर फ़ातिहा नहीं पढ़ना चाहिए। हालांकि ये उन की ग़लत फ़हमी है।
इस्लाम में जिस चीज़ को खाना हलाल और जायज़ है तो उनपर फ़ातिहा पढ़ने में हरगिज़ कोई क़बाहत नहीं, बल्कि मछली तो निहायत उम्दा और महबूब गीज़ा है ।
जैसा कि हदीस शरीफ़ में आया है कि जन्नत में अहले जन्नत को पहली गीज़ा मछली ही मिलेगी । और जो खाना जितना उम्दा और लज़ीज़ होगा फ़ातिहा में भी उसकी फ़ज़ीलत ज़्यादा होगी।
📚ग़लत फ़हमियां और उनकी इस्लाह, सफ़ा 120
✒✒मिन जानिब:- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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