Kya Shauhar Ke Biwi Ko Hath Lagane Se Pahle Mahar Maaf Karana Zaroori Hai?

क्या शौहर के बीवी को हाथ लगाने से पहले महर माफ़ कराना ज़रूरी है?


➡ *काफ़ी लोग यह ख़्याल करते हैं कि शौहर के लिए ज़रूरी है कि निकाह के बाद पहली मुलाक़ात में अपनी बीवी से पहले महर माफ़ कराए फिर उसके जिस्म को हाथ लगाए यह एक ग़लत ख़्याल है इस्लाम में ऐसा कुछ नहीं।*

 महर माफ कराने की कोई ज़रूरत नहीं। आजकल जो महर राइज है, उसे 'गैर मुअज़्ज़ल' कहते हैं जो या तो तलाक़ देने या फिर दोनों में से किसी एक की मौत पर देना वाजिब होता है । इससे पहले देना वाजिब नहीं हां अगर पहले दे दे तो कोई हर्ज नहीं बल्कि निहायत ही उम्दा बात है । माफ़ कराने की कोई ज़रूरत नहीं और महर माफ कराने के लिए नहीं बाँधा जाता है । अब दे या फिर दे, वह देने के लिए है, माफ़ कराने के लिए नहीं ।
  
*हाँ अगर महर 'मुअज़्ज़ल' हो यानी निकाह के वक़्त नक़द देना तय कर लिया गया हो तो बीवी को इख्तियार है कि वह अगर चाहे तो बगैर महर वसूल किए खुद को उसके काबू दे ना दे और उसको हाथ ना लगा दे और चाहे तो बगैर महर लिए भी उसको यह सब करने दे , माफ कराने का यहां भी कोई मतलब नहीं ।*

📚ग़लत फ़हमियां और उनकी इस्लाह, सफ़ा 20-21

✒✒मिन जानिब:- मेम्बरान इल्म की रौशनी

Follow this link to join my WhatsApp group: https://chat.whatsapp.com/C00MxmNGKOWIAjRbdvxaSD

Kya Shauhar Ke Biwi Ko Hath Lagane Se Pahle Mahar Maaf Karana Zaroori Hai?

Post a Comment

0 Comments