लॉक डाउन कर्फ़्यू के सबब नमाज़ ए तरावीह घर पर अदा करना कैसा ?
क्या फ़रमाते हैं औलमाए कराम व मुफ़्तीयाने एजाम इस मसले में कि,
हमारे मुल्क हिन्दुस्तान के हर ख़ित्ते में "कोरोना वॉयरस" के सबब तकरीबन एक माह से ज़्यादा दिनों से लॉक डाउन कर्फ़्यू नाफ़िज़ है और न जाने यह सिलसिला कब तक चलेगा। इस लॉक डाउन के ज़द में माह ए रमज़ान उल मुबारक की इबादात भी आ गए हैं। अब दरयाफ़्त तलब अम्र यह है कि क्या तरावीह की नमाज़ घर पर अदा करना जायज़ है? अगर जायज़ है तो जमाअत से पढ़ेंगे या तन्हा-तन्हा और तरावीह की जमाअत के लिए कितने लोगों का होना ज़रूरी है?
*जवाब :-*
तरावीह की नमाज़ मर्द व औरत सब के लिए बाला जमाअ सुन्नत ए मुअकिदा है । और मर्दों के लिए जमाअत सुन्नत ए कफ़ाया है।
📚 दुर्रे मुख़्तार में है!
*والتراویح سنة مؤكدة لمواظبة الخلفاء الراشدين للرجال والنساء اجماعا، و الجماعة فيها سنة على الكفاية فى الاصح*
*तर्जमा :-* तरावीह की नमाज़ मर्द व औरत के लिए बाला जमाअ सुन्नत ए मुअकिदा है, इस लिए कि ख़ुल्फ़ा ए राशेदीन علیہم الرضوان ने इस पर मदावमत फ़रमाई है। और क़ौल ए अस्ह पर इस की जमाअत सुन्नत ए कफ़ाया है।
📚 दुर्रे मुख़्तार, जिल्द 1, सफ़ा 98
सुन्नत ए कफ़ाया का मतलब यह है कि अगर मस्जिद ए मुहल्ला के सब लोग जमाअत तर्क करेंगे तो सब गुनहगार होंगे और कुछ लोगों ने भी अदा कर ली तो सारे लोग बरीओ ज़िम्मा हो गए।
📚 दुर्रे मुख़्तार अला रद्दुल मोहतार में है!
*التراویح من ان اقامتها بالجماعة سنة على سبيل الكفاية حتى لو ترك اهل محلة كلهم الجماعة فقد تركوا السنة و اساؤوا فى ذالك*-
📚 दुर्रे मुख़्तार अला रद्दुल मोहतार, जिल्द 2, सफ़ा 288
तरावीह की जमाअत दुकान, मकान, मैदान और मस्जिद हर जगह हो सकती है
अगर जमाअत मयसर ना हो या छुट जाए तो घर में तन्हा पढ़ना भी जायज़ है।
📚 फ़तावा आलमगिरी में है!
*لو ادی التراویح بغیر جماعة أو النساء موحدانا فى بيوتهن يكون تراويح كذا فى معراج الدراية*-
*तर्जमा :-* अगर तरावीह तन्हा अदा करे या औरतें अपने-अपने घरों में तन्हा पढ़ें तरावीह हो जाएगी।
ऐसा ही मेराज उल दरायह में है।
📚 फ़तावा आलमगिरी, जिल्द 1, सफ़ा 115
जमाअत के लिए कम से कम दो आदमी का होना ज़रूरी है। हज़रत अबु मूसा अशअरी رضی اللہ تعالٰی عنہ से मरवी है कि हुज़ूर नबी ए अकरम “ﷺ” ने फरमाया :-
*اِثْنَانِ فَمَا فَوْقَهُمَا جَمَاعَةٌ*-
*तर्जमा :-* दो या दो से ज़्यादा अफ़राद पर जमाअत है।
((📙ابن ماجه، السنن، کتاب إقامة الصلاة والسنة فيها، باب الاثنان جماعة ۔ ١-٥٢٢-، رقم : ٩٧٢))
जब पूरे मुल्क हिन्दुस्तान में "कोरोना वॉयरस" के सबब दफा 144 / लॉक डाउन कर्फ़्यू नाफ़ीज़ है और इसके पेशे नज़र दो चार अफ़राद के सिवा अक्सर मुसलमानों का हाज़री मस्जिद भी मोतअज़र हो गया है तो इस सूरत में जितने लोगों को मस्जिद में जमाअत की इजाज़त हासिल है उतने ही मस्जिद में तरावीह की नमाज़ बा जमाअत अदा कर लें ताकि तर्क जमाअत का गुनाह अहले मोहल्ला व अहले क़रीय्या को न हो। मा बक़िया हज़रात अगर जमाअत मयस्सर हो तो घर पर ही दो तीन अफ़राद मिल कर जमाअत से पढ़ें और अगर जमाअत मयस्सर न हो तो तन्हा-तन्हा पढ़ें तरावीह हो जाएगी। तर्क ए जमाअत ए मस्जिद का गुनाह नहीं होगा। अलबत्ता घरों में भी जमाअत से तरावीह अदा करना तन्हा पढ़ने से बेहतर है।
*قال النبی صلی الله عليه وسلم صلاة الجماعة تفضل صلاة الفذ بسبع و عشرين درجة۔*
واللہ تعالیٰ اعلم بالصواب۔
✍🏻कतबः __ मुफ़्ती मुहम्मद रिज़वान अहमद मिस्बाही, रामगढ़ (झारखंड)
📱9576545941
✒️✒️मिन जानिब :- रज़वी दारुल इफ़्ता व
✒️✒️ इल्म की रौशनी
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