Lockdown Ke Sabab Malike Nisab Se Pak Nagad Rupay Nahi Ya Rupay To Hain Magar Mustahqeen wa Muhsalin Ke Paas Pahunchana Mutaujr Hai To Adaaedgi E Zakat Ka Kya Huqm Hai?

लॉक डाउन के सबब मालिके निसाब के पास नगद रुपए नहीं या रुपए तो हैं मगर मुस्तहक़ीन व मुहसलिन के पास पहुंचाना मुतउज़र है तो अदाएगी ज़कात का क्या हुक्म है?


क्या फ़रमाते हैं औलमाए दीन व मुफ़्तीयाने शरअ मतीन इस मसला में कि
एक शख़्स मालिके निसाब है उस के कुछ पैसे बैंक में हैं और कुछ दूसरे लोगों के पास अभी उसके हाथ में इतने रुपये नहीं है कि सदक़ा ए ईदउल फ़ितर या ज़कात अदा कर सके। निज़ अगर किसी के पास रुपये पैसे तो हैं लेकिन इस वबाई मर्ज़ कोरोना वायरस और लॉक डाउन कर्फ़्यू के सबब लोगों का इधर-उधर आना जाना मोक़ुफ़ हो गया है इस लिए न मदारिसे इस्लामिया के मुहसलिन तहसील सदक़ात व ज़कात कर रहे हैं और न दूसरे मुस्तहक़ीन। तो इस सूरत में अब दरयाफ़्त तलब अम्र ये है कि इन दोनों के सदक़ात व ज़कात अदा करने का क्या हुक्म है क़ुरआन व हदीस की रोशनी में जवाब इनायत फ़रमा कर माजूर हों। 

*जवाब :-*
शरअन जो मालिके निसाब है उस पर ज़कात फ़र्ज़ है। 
क़ुरआन ए मजीद में है! 
*واتوا الزكوة-*
यानी और तुम ज़कात अदा करो। 
📚 क़ुरआन उल करीम

मालिके निसाब के साथ साथ वजुबे ज़कात की शर्तों में एक शर्त माल पर हवलानेहोल (यानी पूरा एक साल गुज़रना) भी है। 
फ़तावा आलमगिरी में है!

*و منھا حولان الحول علی المال۔۔۔۔۔۔ و اذا کان النصاب کاملاً فی طرفی الحول فنقصانه فيما بين ذالك لا يسقط الزكاة كذا فى الهداية*-

*तर्जमा-* और वजुबे ज़कात की शर्तों में एक शर्त माल पर पूरा एक साल गुज़रना भी है और जब निसाब शुरू और आख़िर साल में मुकम्मल है तो दरमियानी साल में कम हो जाने से ज़कात साक़ित नहीं होगी, ऐसे ही हिदाया में भी है। 
📚 फ़तावा आलमगिरी, जिल्द 1, सफ़ा 175

साल गुज़रने के बाद बेला उज़रे शरई क़सदन अदाएगी ज़कात में ताख़िर करने वाला गुनहगार व मर्दूदूश्शहादा है। 
इसी में है!

*تجب علی الفور عند تمام الحول حتیٰ یاثم بتاخیرہ بلا عذر*-

*तर्जमा-* साल ताम होने पर फ़ौरन ज़कात की अदाएगी वाजिब है, बेला उज़रे शरई ताख़िर के सबब गुनहगार होगा।

📚 फ़तावा आलमगिरी, जिल्द 1, सफ़ा 170

पूरे मुल्के हिन्दुस्तान में दफ़ा 144/लॉक डाउन कर्फ़्यू का निफ़ाज़ है, इसी के सबब हर एक इंसान परेशान है, हर एक का कारोबार, और आमद व रफ़त बंद है, न कोई कहीं आ जा सकता है, और न कोई कुछ कारोबार कर सकता है, बाअज़ के पास रुपए पैसे नहीं और बाअज़ के पास हैं तो बैंक में हैं हाथ में नहीं वो ख़ुद दाने दाने को मोहताज हैं, बैंक तो खुला है मगर पुलिस अमलह् के ख़ौफ़ व दहशत के सबब घर से बाहर निकलने से क़ासीर हैं, बाअज़ के पास रुपए पैसे हैं लेकिन मुहसलिन व मुस्तहक़ीन के अंदर भी वही पुलिस अमलह् का ख़ौफ़ व हरास जागुज़े है, यक़ीनन इस सूरत में जकात व सदक़ात अदा करना और वसूल करना मुतअज़र हो गया है। और जब किसी उज़्र की बिना पर सदक़ात व ज़कात अदा करना और वसूल करना मुतअज़र हो जाए। (मसलन साल मुकम्मल हो गया मगर हाथ में रुपए नहीं या रुपए तो हैं मगर मुस्तहक़ीन नहीं) तो इन सब सूरतों में क़तअन उज़रे मुतहक़्क़ि है। और जब उज़रे मुतहक़्क़ि हो जाए तो इंसान मज़बूर और माअज़ुर  महज है। 
लिहाज़ा मज़कुरह बाला दोनों सूरतों में ज़कात की अदाएगी में ताख़िर के सबब लोग गुनहगार न होंगे। उज़्र की बिना पर ज़कात की अदाएगी में ताख़िर जायज़ है। 
अलआनियह शरहुल हिदाया में है!

*و قوله ( ثم قيل هى واجبة على الفور) و هو قول الكرخى فانه قال: يأثم بتاخير الزكاة بعد التمكن*-

*नोट :-* वाज़ेह रहे कि फ़िज़माना आॅन लाइन रक़म ट्रान्सफ़र की सहुलियात मौजूद हैं, अगर किसी के पास वो सहुलतें फ़राहम हैं, तो वो बैंक जाए बग़ैर आॅन लाइन अपनी ज़कात अदा करे, ज़कात अदा हो जाएगी, इस सूरत में वो माअज़ुर नहीं, क्योंकि लोगों की सहूलत और आसानी के लिए अहले मदारिस ए इस्लामिया ने अदाएगी ज़कात व सदक़ात के लिए अपने अपने एदारे  का अकाउंट नम्बर फ़राहम  कराए हैं, जिस में बाअसानी बैंक जाए बग़ैर आॅन लाइन ज़कात की रक़म ट्रांसफ़र की जा सकती है, हां अगर किसी के पास यह सब सहूलियात भी नहीं हैं और किसी से ट्रांसफ़र कराना भी मुतअज़र हो तो फ़िर वह मुतअज़र माना जाएगा, और अदाएगी ज़कात में ताख़िर के सबब गुनहगार नहीं होगा। 
और सदक़ा ए फ़ितर के मुतल्लिक हुज़ूर सदरुश्शरीआ علیہ الرحمہ तहरीर फ़रमाते हैं कि!

*सदक़ा ए फ़ितर वाजिब है, उम्र भर इस का वक़्त है, यानी अगर अदा न किया हो तो अब अदा कर दे। अदा न करने से साक़ित न होगा। न अब अदा करना क़ज़ा है बल्कि अब भी अदा ही है अगरचे मसनून क़बले नमाज़ ए ईद अदा कर देना है।*

📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 1, हिस्सा 5, सफ़ा 935
📚 दुर्रे मुख़्तार

واللہ تعالیٰ اعلم بالصواب 

✍🏻 *कतबः  ___ मुफ़्ती मुहम्मद रिज़वान अहमद मिस्बाही रामगढ़-*
📱9576545941

✒️✒️ मिन जानिब :- रज़वी दारूल इफ़्ता व

✒️✒️ इल्म की रौशनी

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