लॉक डाउन बरक़रार रहे तो जुम्मातुलविदा और ईद के लिए क्या करें?
जुम्मातुलविदा और नमाज़ ए ईद की फ़ज़िलत व सवाब कैसे पायें?
1️⃣ पहले एक ईमान अफ़रोज़ हदीस सुनिए :-
अल्लाह के प्यारे रसूल “ﷺ” एक ग़ज़वा से वापस होते वक़्त जब मदीना मनव्वरा के क़रीब आ गए तो सहाबा से ख़िताब करके फ़रमाया : मदीना शरीफ़ में कुछ ऐसे लोग भी मुक़ीम हैं कि तुम लोग जहां जहां भी गए वह लोग हर जगह (नियत ए इबादत व सवाब ए इबादत में) तुम्हारे साथ थे।
सहाबा ए कराम ने अर्ज़ की या रसूल अल्लाह, “ﷺ” वह लोग तो मदीना में हैं (हमारे साथ शरीक ए इबादत कैसे हो गए?) तो सरकार “ﷺ” ने फ़रमाया وَھُم بِا لْمَدِیْنَةِ، حَسَبَھُمُ الْعُذْرُ हाँ वह लोग मदीना में हैं, उन्हें तुम्हारे साथ आने से उज़्र ने रोक रखा है। (📚बुख़ारी शरीफ़ जिल्द 2, सफ़ा 637)
इस से यह मालूम हुआ कि दिल में नियत ए इबादत हो मगर उज़्र की वजह से न कर सके तो इबादत का सवाब पाएगा।
उम्दतूल क़ारी शरह बुख़ारी में है :
इस हदीस से मालूम हुआ कि जो शख़्स उज़्र की वजह से नेकियों के काम न कर सके हालांकि उस की नियत करने की है तो उस के लिए इन नेकियों का सवाब लिखा जाएगा, जैसा कि एक शख़्स की आँख लग गई, उस वजह से वह सलातूल लैल न पढ़ सके तो सरकार “ﷺ” ने फरमाया : یَکْتُبُ لَهٗ اَجْرُ صَلَاتِهٖ، وَکَانَ نَوْ مُهٗ صَدَقَةً عَلَیْہِ، इस के लिए नमाज़ का सवाब लिखा जाएगा और इसकी नींद इस पर अल्लाह का सदक़ा है। (📚उम्दतूल क़ारी, जिल्द 14, सफ़ा 188)
और क़ुरमानी शरह बुख़ारी में है :
فَیْهِ دَلِیْلٌ عَلیٰ أنَّ الْمَعْذُوْرَ لَهٗ ثَوَابُ الْفِعْلِ أِذَا تَرَکَهٗ لِلْعُذُرِ
यह हदीस इस बात की दलील है कि माअज़ूर उज़्र की वजह से इबादत न कर सके तो उसे इबादत का सवाब मिलेगा।
आप इस साल कोरोना वायरस और लॉक डाउन के उज़्र की वजह से जुम्मातुलविदा और नमाज़ ए ईद की जमाअत में हाज़िर नहीं हो पा रहे हैं मगर ख़ुदा ए करीम के करम की बारिश से आप फै़ज़ याब जरूर होंगे।
*2️⃣ जुम्मातुलविदा की फ़जीलत व सवाब से सरफ़राज़ी:*
जुम्मा के बाद आप हज़रात तन्हा-तन्हा ज़ोहर की फ़र्ज़ नमाज़ और सुन्नतें घर में पढ़ें, आपको इन नमाज़ों का सवाब भी मिलेगा, साथ ही उज़्र की वजह से आप को जुम्मातुलविदा की जमाअत में हाज़री की भी फ़ज़ीलत हासिल होगी, और अज़्र व सवाब भी मिलेगा जैसा कि यह सरकार “ﷺ” की बशारत है।
नमाज़ तो वही मक़बूल ए बारगाह होती है जो शरीअत की हिदायत के मुताबिक़ हो और जुम्मा के बदले जो ज़ोहर पढ़ी जाती है उसके बारे में शरीअत की हिदायत यही है कि तन्हा-तन्हा पढ़ें, जमाअत से नहीं, आख़िर जब शरीअत ए ताहिरा उस पर राज़ी है कि हम तन्हा-तन्हा पढ़ें तो हम को भी उसी पर राज़ी होना चाहिए, हमें तो हुक्म बज़ा लाने से मतलब है बाक़ि उस की हिक़मत और राज़ साहिब ए शरीअत को मालूम है।
*3️⃣ नमाज़ ए ईद की फज़ीलत व सवाब से सरफ़राज़ी :-*
यूं ही हम लोग लॉक डाउन और दफा 144 की वजह से नमाज़ ए ईद की जमाअत में भी हाज़री से महरूम हो रहे हैं मगर यह सिर्फ़ जिस्मानी हाज़री से महरूमी है क्योंकि नियत ए हाज़री की वजह से हम इनदल्लाह वहां हाज़िर हैं और हमें वहां की हाज़री ए जमाअत का सवाब भी पूरा मिल रहा है।
अब इसके साथ हम घर में भी नमाज़ ए ईद के बाद कुछ इबादत कर लें तो हमारा सवाब انشاء اللہ दो बाला हो जाएगा।
🟣 दुर्रे मुख़्तार और बहार ए शरीअत में है कि नमाज़ ए ईद के बाद चार रक्अत नफ़्ल नमाज़ घर में पढ़ना मुस्तहब है, यूं भी चाश्त के वक़्त में चार रक्अत नमाज़ पढ़ने की अहादिस ए नबवीया में बड़ी फ़ज़ीलत आई है, लिहाज़ा नमाज़ ए ईद के बाद ये चार रक्अत हम लोग अपने-अपने घरों में अहले खाना के साथ ज़रूर पढ़ लें, घर में कोई इमाम हो तो मुख़्तसर जमाअत कर सकते हैं, वरना तन्हा-तन्हा पढ़ें कि शरीअत को ये नमाज़ तन्हा-तन्हा महबूब है।
🟡 ये भी इख़्तियार है कि आप घर में दो ही रक्अत पढ़ें कि ये भी मनदुब है मगर चार रक्अत की फ़ज़ीलत दो रक्अत से बहरहाल ज़्यादा होगी, यहां भी तफ़सील ए बाला के मुताबिक़ जमाअत से या तन्हा-तन्हा पढ़ सकते हैं।
हदीस में है कि रसूल अल्लाह “ﷺ” नमाज़ ए ईद से पहले (ईदगाह में) कोई नमाज़ नहीं पढ़ते थें, जब अपने घर वापस आ जाते तो दो रक्अत नमाज़ पढ़ते। ये हदीस सुनन इब्ने माजा में सहाबी ए रसूल हज़रत अबु सईद ख़ुदरी رضی اللہ تعالٰی عنہ से मरवी है, ऐसा ही फ़तहुलक़दीर में है (📚 रद्दुल मोहतार , बाबुल ईदैन)
इस तरह इस साल आपको सरकार “ﷺ” की इस नमाज़ पर अम्ल करने की सदाअत मिल रही है और ये सदाअत भी बहुत है।
हाँ सलाम फेरने के बाद दोनों सूरतों में चौंतीस(34) बार اللہ اکبر ، اللہ اکبر जरूर पढ़ें, एक तो इस वजह से कि हदीस नबवी में इस की फ़ज़ीलत आई है, दूसरे इस वजह से कि ईद की नमाज़ में हर रक्अत में तीन-तीन (3) बार اللہ اکبر पढ़ने का हुक्म है, जिस से मक़सूद अल्लाह तआला की बड़ाई का इज़हार है, आप इस बड़ाई का इज़हार अपने घर में इस तरह कीजिए।
*4️⃣नियत यूं कीजिए :-* नियत की मैंने चार रक्अत, या नियत की मैंने दो रक्अत नमाज़ ए नफ़्ल की अल्लाह के लिए।
मुँह से बोलना जरूरी नहीं, दिल में इसका पक्का इरादा भी काफ़ी है
▪️इस नमाज़ में छह (6) ज़ायद तकबीरें न कहें, हाँ! सलाम के बाद चौंतीस(34) बार اللہ اکبر पढ़ें
▪️इस नमाज़ के बाद ख़ुत्बा भी नहीं अलबत्ता नमाज़ के बाद घर वालों को दीन की ज़रूरी बातें बताएं और नमाज़ के बाद दुआ ज़रूर करें।
5️⃣▪️ईद बहुत सादा तरीक़े से मनाएं
▪️धुले हुए साफ़ सुथरे कपड़ों को काफ़ी समझें
▪️मोहताजों की हाजत रवाई करें, ख़ास कर पड़ोसियों की दिल जोई करें ▪️कहीं भी भीड़-भाड़ लगाने से बचें।
✍🏻✍🏻 मुहक़िक़े मसाइल ए जदीदा अल्लामा व मौलाना मुफ़्ती मुहम्मद निज़ामुद्दीन मिस्बाही रज़वी क़ादरी
सदरुल मुदरीसीन Principal अल जामियतुल अशरफ़ीया मुबारकपूर,
यु.पी. हिन्द
✒️✒️मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
Lockdown Mein Jummatulwida Aur Eid Ki Namaz Ke Liye Kya Karen?
0 Comments