शब ए बरात के फ़ज़ाइल
माहे शाअ्बान बहुत ज़्यादा महबूब
➡️ शैख़ अबु नस्र رحمۃ اللہ علیہ ने बाला सनाद हज़रत ए आईशा सिद्दिक़ा رضی اللہ تعالٰی عنہا से रिवायत की है कि रसूलल्लाह “ﷺ” इस तरह मुसलसल रोज़े रखते थें कि हम ख़्याल करने लगते कि आप “ﷺ” किसी दिन का रोज़ा नहीं छोडेंगें। और जब आप “ﷺ” रोज़ादार न होते तो हम ख़्याल करते कि अब आप “ﷺ” रोज़ा नहीं रखेंगे। आप “ﷺ” को शाअ्बान के रोज़े बहुत ज़्यादा महबूब थे। मैंने अर्ज़ किया या रसूलल्लाह “ﷺ” क्या सबब है आप “ﷺ” माहे शाअ्बान में रोज़े रखते हैं? आप “ﷺ” ने फ़रमाया आईशा رضی اللہ تعالٰی عنہا ये ऐसा महीना है कि साल के बाक़ी अरसा में मरने वालों के नाम मलकुल मौत को लिख कर इस माह में दे दिए जाते हैं मैं चाहता हूँ कि मेरा नाम ऐसी हालत में लिख कर दिया जाए कि मैं रोज़ादार हूँ।
📚गुनियतुत तालिबिन
📚फैज़ान ए शरीअत, शब ए बरात के फ़ज़ाइल, सफ़ा 1043,1044
✒️✒️मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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Shab E Baraat Ke Fazail
Maah E Shabaan Bahut Zyada Mahboob
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