मस्जिद
1.हज़रत ए उस्मान ए ग़नी رضي الله عنه ने कहा कि रसूल ए करीम “ﷺ” ने फ़रमाया की :-
जो सख़्श ख़ुदा ए तआला (की ख़ुशनूदी) के लिए *मस्ज़िद बनाएगा* तो ख़ुदा ए तआला *उस के सिले में ज़न्नत में घर बना देगा* ।
📚मुस्लिम शरीफ़ ,जिल्द 1 ,सफ़ा 201
📚मिशकात शरीफ़ ,सफ़ा 68
📚अनवारुल हदीस , सफ़ा 165
2. *हज़रत अबु हुरैरा* رضي الله عنه ने कहा कि हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया की :-
ख़ुदा ए तआला के नज़दीक तमाम आबादियों में *महबूब तरीन जगहें उस की मस्जिदें हैं* और *बदतरीन मक़ामात बाज़ार* हैं ।
📚मुस्लिम शरीफ़ ,जिल्द 1 ,सफ़ा 236
📚मिशकात शरीफ़ , सफ़ा 68
📚अनवारुल हदीस , सफ़ा 165
3⃣ *हज़रत हसन बसरी* رضي الله عنه से बतरीक़ मुरसिल रिवायत है कि हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया की :-
एक जमाना ऐसा आएगा कि *लोग मस्जिदों के अंदर दुनिया की बातें करेंगे तो उस वक़्त तुम उन लोगों के पास न बैठना* । ख़ुदा ए तआला को उन लोगों की कुछ परवाह नहीं ।
📚मिशकात शरीफ़ , सफ़ा 71
📚अनवारुल हदीस , सफ़ा 166
▶ *मस्जिद* के दरख़्तों में से किसी दरख़्त का फल या फूल क़ीमत अदा किए बग़ैर *खाना या लेना जायज़* नहीं ।
📚फ़तावा रज़विया , जिल्द 3,सफ़ा 602,
📚फ़तावा रज़विया , जिल्द 6 , सफ़ा 450
📚अनवारुल हदीस ,167
▶ *मस्जिद* के छत पर बिला ज़रूरत नमाज़ पढ़ने की इजाज़त नहीं की मस्जिद की छत पर बग़ैर ज़रूरत चढ़ना ममनु और *बेअदबी* है और गर्मी का अज़्र नहीं सुना जाएगा । हाँ अगर नमाज़ियों की कसरत की वजह से मस्जिद का निचे वाला हिस्सा भर जाए और लोगों को नमाज़ पढ़ने के लिए जगह न मिले तो *उस सुरत में मस्जिद की छत पर नमाज़ पढ़ने की इजाज़त* है ।
📚फ़तावा रज़विया ,जिल्द 6,सफ़ा 420
📚अनवारुल हदीस, 167
▶ *दुनिया* की बातों के लिए मस्जिद में जाकर बैठना *हराम* है ।मस्जिद में दुनिया का कलाम *नेकियों* को ऐसे खा जाता है जैसे *आग लकड़ी* को ये तो मुबाह (जायज़) बातों का हुक़्म है , फ़िर अगर बातें ख़ुद बुरी हों तो वह *हराम दर हराम* और अज़ाब ए शदीद का सबब है ।
📚फ़तावा रज़विया , जिल्द 3 ,सफ़ा 602
📚अनवारुल हदीस, 167
✒✒मेम्बरान इल्म की रौशनी
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