Maut Ki Takleef



मौत की तकलीफ़


एक साहब अक्सर मरीज़ों से मौत की सख़्ती के मुतल्लिक़ गुफ़्तगू किया करते थे , जब वह ख़ुद मरज़ुलमौत में मुब्तेला हुए तो लोगों ने उनसे मौत की शिद्दत के बारे में सवाल किया। वह कहने लगे, ऐसा महसूस होता है जैसे आसमान और ज़मीन मिल गए हैं और मेरी रूह सुई के नाके से निकल रही है। 
और एक रिवायत में है कि अगर मौत की तकलीफ़ का एक क़तरा दुनिया के पहाड़ों पर रख दिया जाए तो सब पहाड़ पिघल जाएं ।
अल्लाहु अकबर

📚 मुकाशिफ़तुल क़ुलुब 
📚फैज़ान ए शरीअत, सफ़ा 972

✒✒मिन जानिब:- मेम्बरान इल्म की रौशनी

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Maut Ki Takleef
Faizan E Shariat

ILM KI RAUSHNI

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