मय्यत का खाना खाना कैसा है?
मय्यत के तीजे, दसवें या चालीसवें वगै़रह के मौक़े पर दावत करके खाना खिलाने का जो रिवाज है ये भी महज़ गलत और ख़िलाफ़े शरअ है, हाँ गरीबों और फ़क़ीरों को बुला कर खिलाने में हर्ज नहीं।
*आला हज़रत फ़रमाते हैं*:- मुर्दे का खाना सिर्फ़ फ़ोक़रा (फ़क़ीर) के लिए है आम दावत के तौर पर जो करते हैं ये मना है, ग़नी(मालदार) न खाने ।
📚अहकाम ए शरीअत, हिस्सा 2, सफ़ा 129-130
और फ़रमाते हैं मौत में दावत बे माअ्ना है, *फतहुल क़दीर में इसे बिदअत ए मुस्तक़बहा(बुरी बिदअत) फ़रमाया* ।
📚फ़तावा रज़वीया, जिल्द 4, सफ़ा 221
📚ग़लत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह, सफ़ा 43
✒✒मिन जानिब:- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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