Muqtadi Ke Sar Par Zamana Ho Aur Imam Ke Na Ho

मुक़तदी के सर पर अमामा हो और इमाम के न हो



अगर मुक़तदी के सर पर अमामा जिसे साफ़ा और पगड़ी भी कहते हैं बांध कर नमाज़ पढ़ने और इमाम के सर पर पगड़ी न हो तो इसे कुछ लोग बुरा जानते हैं बल्कि बाअज़ ये समझते हैं कि इस सूरत में मुक़तदी की नमाज़ दुरुस्त नहीं हुई ये ग़लत बात है।

अगर इमाम के सर पर पगड़ी न हुआ और मुक़्तदी के हो तो मुक़तदी की नमाज़ दुरुस्त और सहीह् हो जाएगी।
आला हज़रत رضي الله عنه‎‎ से ये मसअ्ला मालूम किया गया तो फ़रमाया बिला तकल्लुफ़ दुरुस्त है।

📚फ़तावा रज़वीया, जिल्द 3, सफ़ा 273
📚इरफ़ान ए शरीअत, सफ़ा 4
📚ग़लत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह, सफ़ा 32

✒✒मिन जानिब:- मेम्बरान इल्म की रौशनी

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