ज़िहाद के फ़ज़ाइल
➡ मुश्क जैसी ख़ुशबू
शहंशाहे दो जहाँ हुज़ूर “ﷺ” ने इरशाद फ़रमाया :- जिस मुसलमान ने अल्लाह ﷻ, के रास्ते में ऊंटनी के दो दफ़ा दूध दुहने के दरमियान के वक़्त के बराबर भी ज़िहाद किया उसके लिए जन्नत वाजिब हो गई और जो राहे ख़ुदा में जख़्मी हुआ या उसे चोट आई तो वह क़यामत के दिन पहले से ज़्यादा ताज़ा ज़ख्म के साथ आएगा उसका रंग ज़ाफ़रान जैसा और ख़ुशबू मुश्क जैसी होगी।
📚अबु दाऊद
📚फैज़ान ए शरीअत, सफ़ा 1020
✒✒मिन जानिब:- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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