मुस्लिम मुआशरे की शहज़ादी और कॉलेज
तू मग़रिब की कोई लैला नहीं,
मशरिक की है दुख़्तर
उम्मीदों का एक जहां दिल में समेट कर एक बाप अपनी नन्ही सी कली को तालीम हासिल करने के लिए स्कूल या कॉलेज में भेजता है और यह गुमान करता है कि उसकी शहज़ादी उसका नाम रौशन करेगी। उसके ख़्वाबों की हसीन ताबीर बनेगी । मगर हज़ार अफ़सोस का मक़ाम है कि आजकल वाक़्यी उसके बर ख़िलाफ़ होता है। वह ख़्वाबों की ताबीर नहीं बल्कि ज़िंदगी भर की आर और बदनामी बन जाती है। जिस शहज़ादी को उसकी मां एक शहज़ादे की कहानियां सुनाकर सुलाती थी वहीं आज इस क़दर बेबाक हो गई के ख़ुद ही वक़्त गुज़ारने का एक ज़रिया तलाश करने निकल पड़ी। मां-बाप की ख़्वाहिश तो यह थी कि हमारी यह नाजुक सी कली किसी सफ़ेद पोश शहज़ादे के साथ रहेगी मगर यह देखकर आंखें मातम करती हैं कि इस शहजा़दी का दिल तो एक चूड़ें चमार से ज़्यादा ज़लील शख़्स पर आया हुआ है। अपने ख़ानदान की इज़्ज़त का जनाज़ा सर पर उठाए कॉलेज की दरो दीवार के अंदर अपने नाम-नेहाद साथी बॉयफ्रेंड (Boyfriend) के साथ घूम रही है। जिससे उम्मीद तो यह थी कि वह हमेशा अपने शौहर की ख़िदमत और उससे मोहब्बत के वादे करेगी वह किसी और के साथ जीने मरने की क़समें खा रही है। हलक़ में पानी कलम की रोशनाई सूखने लगती यह सोचकर के मां बाप पर क्या बीतती होगी यह जानकर कि जिसका नाम सुनकर वह फ़ख़्र से सर ऊँचा कर लेते थे उसी ने आज उनका नाम मिट्टी में मिला कर ख़ानदान की इज़्ज़त को ज़मींदोज कर दिया है।
इसी पर बस नहीं है बल्कि अगर किसी शरीफ़ लड़की को पर्दा, हया और इन तालुक़ात की मज़म्मत करते हुए पाया तो उसे बैकवर्ड (Backward) और अनपढ़ गवार कहकर छिड़क दिया । और जब उसी शहज़ादी के दिल में शैतान जैसी ख़यालात की आमद ओ रफ़्त को तेज़ करता है तो यही लड़की जो अपने साथ सिर्फ़ अपनी नहीं बल्कि एक ख़ानदान, एक क़ौम को साथ लेकर चलती थी वही एक शब्द एक शब बाशी (One Night Stand) जैसी गलीज़ तरीन हरकत तक को अंजाम दे देती है।
यह सब कुछ तो फ़िर भी प्यार के नाम पर किया जा रहा है और करने वाले कम से कम इसे किसी हद तक ग़लत जानते हैं। मगर अल्लाह की पनाह एक ख़तरा ऐसा भी है जो बहुत आम है और उसे लोग बुरा भी नहीं समझते। इस वबा का नाम बेस्ट फ्रेंड (Best Friend) यानी सबसे अच्छा दोस्त है और उसका मतलब आज के वक़्त में यह हो गया है कि किसी अजनबी मर्द के साथ जो चाहो करो उसे छुओ ,उसका हाथ पकड़ो, उसकी पीठ थपथपाओ, रात रात भर उससे बातें करो, उसे घर पर बुलाओ, मां-बाप के सामने गुफ़्तगू के गुंचे चटकाओ, उसके साथ फिल्में देखने जाओ, उससे हम रिकाबी यहां तक कि एक ही बिस्तर में सो जाओ। मगर जब कोई ख़ुदा का ख़ौफ़ रखने वाला कहें कि यह कैसी अय्याशि है यह तो उसे बड़े तपाक से जवाब दो कि हम सिर्फ़ दोस्त हैं।(We Are Just Friends)
अरे अल्लाह की बंदी क्या इस फ़ुक़रे ने तुम्हें दुनिया भर के गुनाह करने का लाइसेंस (License) दे दिया ? क्या अल्लाह के हुज़ूर यह जवाब देने की हिम्मत है? यह वही शैतानी फ़ुक़रा है जिसने कई लड़कियों की इज़्ज़त बर्बाद करदी। वह भोली भाली शहज़ादी तो यह समझ रही थी कि यह शख़्स सिर्फ़ दोस्ती चाहता है मगर उस ज़ालिम की बुरी नज़र तो उसकी इस्मत पर थी। और जब उसने अपना मक़सद पूरा कर लिया तो वह यह कह कर निकल गया के (We Are just friends) मगर इस शहज़ादी की सारी पाक-दामनी ख़त्म हो गई।
और दिल पर पत्थर रख के अर्ज़ करना पड़ रहा है कि इतनी अय्याशी और सर कशी के बाद भी जब नफ़्स की ख़्वाहिश पूरी होती नज़र नहीं आती तो फ़िर यही शहज़ादी गुनाहों के सबसे ग़लीज रास्तों को इख़्तयार करती है।मां-बाप से झूठ बोलकर अजनबी लड़कों के साथ मुलाकातों (Dates) पर जाती है और खुले तौर से अपने आप को गै़र की तहवील में देकर सिर्फ़ एक खिलौना बन कर रह जाती है। और जब यही क़समें वादे खाने वाला शख़्स उसका इस्तेमाल करके चला जाता है तो बदहवासी के आलम में यही शहज़ादी मौत को ही अपने दर्द का मदादा समझ कर ख़ुदकुशी कर लेती है। यह कोई कहानियां या अफ़सानों में से मुंतख़ब बातें नहीं है यह वह हक़ीक़त है जिससे अख़बार की अवराक़ और चश्मदीदों की आंखें सियाह हैं। अजनबी मर्दों के साथ मोटरसाइकिल पर घूमना, बेहतरीन रेस्टोरेंट में जाकर शम्मा मोमबत्ती में खाना तनावुल करना, जिसे (Candle Light Dinner) कहा जाता है उनके साथ Home Stay करना, यह सब कुछ आज आम होता जा रहा है। मगर याद रखना कि यह तमाम काम लिखे जा रहे हैं और जितना भी चाहो गुनाह कर लो मगर यह कभी मत सोचना कि उसकी सजा नहीं मिलेगी बेशक मिलेगी दुनिया में भी और आख़िरत में भी।
और जहां इन तमाम बातों की जिम्मेदार ऐसी शहज़ादियां हैं वहीं उनके मां-बाप भी बिल्कुल इल्जा़म से बरी नहीं है क्योंकि उन्होंने अपनी बेटी को पर्दे के अहकाम नहीं सिखाए, क्यों उसे अजनबी मर्दों से बात करने से नहीं रोका, अगर पहले ही से अपनी फूल सी बच्ची को फिल्में, ड्रामें दिखाने के बजाए सीधे *सय्यदा फातमा ज़हरा रदिअल्लाहू अन्हा* की सीरत पढ़ाई होती तो आज इस तरह उनकी लख़्ते जिगर दर्दे सर ना बनती। जिन लोगों की बेटियां कॉलेजेस में पढ़ रही हैं वह भी उसे नोट करें और बरवक़्त सही इकदामात लें वरना नतीजे अच्छे नहीं होंगे अल्लाह हमारी हिफाज़त करें और उसी के साथ शहज़ादियों तुम भी सुनो
ऐ मिल्लत इस्लामिया के मेअमारो आज यह भाई तुम से इल्तिजा कर रहा है ख़ुदा के वास्ते यह ज़ुल्म ना करो अपनी इज़्ज़त अपने हाथों नीलाम ना करो। यह दुनिया तो ख़त्म हो जाएगी यह रिश्ते तो ख़त्म हो जाएंगे, यह जवानी, यह हुस्न उसमें सब फ़ना हो जाएगा, मगर गुनाह से अगर तौबा ना की तो यह गुनाह तुम्हारे साथ क़्यामत तक रहेंगे और जब रब्बुल आलमीन तुमसे सवाल पूछेगा तो क्या जवाब दोगी ? क्या उज़्र पेश करोगी? आज भी वक़्त है तौबा का दरवाज़ा तो बंद नहीं हुआ है, आओ अपने रब की तरफ पलट आओ वो बड़ा रहीम है बड़ा करीम है। उसने बड़े-बड़े गुनाहगारों को बख़्श दिया तुम सच्चे दिल से तौबा करो वह तुम्हें भी बख़्श देगा। बस तुम्हें इतना करना है कि मुसल्ला बिछाकर नमाज़ अदा करो और फ़िर गिड़गिड़ा कर प्यारे मुस्तफ़ा “ﷺ” का वास्ता देकर रब के हुज़ूर तौबा कर लो। अपनी ज़िंदगी बर्बाद होने से बचा लो अपनी इस्मत महफूज़ कर लो।
अल्लाह हम सब की मां-बहनों , बिलख़ुसूस हमारी स्कूल कॉलेज में पढ़ने वाली बहनों की इज्ज़तों की हिफाज़त फ़रमाए, और हम सबको नेक रास्ते पर चलने की तौफीक़ अता फ़रमाए । आमीन
*✍🏻फरदीन अहमद रज़वी साहब*
*इस्लाह ए मुआशरा की हमारी इस मुहिम का आप भी हिस्सा बनें।*
✒️✒️मिन जानिब:- इल्म की रौशनी
Muslim Muashre Ki Shahzadi Aur Collage
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