नमाज़ ए जनाज़ा के बाद उसी वज़ु से दूसरी नमाज़ पढ़ना कैसा है?
➡ बआज़ जगह लोग समझते हैं कि जिस वज़ु से नमाज़ ए जनाज़ा पढ़ी हो उस से दूसरी नमाज़ नहीं पढ़ी जा सकती, हालांकि ये ग़लत और बे अस्ल बात है।
बल्कि उसी वज़ु से फर्ज़ हों या सुन्नत व नफ़्ल हर नमाज़ पढ़ना दुरुस्त है।
📚ग़लत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह, सफ़ा 16
✒✒मिन जानिब:- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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ILM KI RAUSHNI
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