नसबंदी कराने वाले की इमामत का हुक्म
नसबंदी कराना इस्लाम में हराम है लेकिन कुछ लोग ख़्याल करते हैं कि जिस ने नसबंदी कराली अब वह ज़िन्दगी भर नमाज़ नहीं पढ़ा सकता, हालाँकि ऐसा नहीं है बल्कि इस्लाम में जिस तरह और गुनाहों की तौबा है उसी तरह इस गुनाह की भी तौबा है।
यानी जिस की नसबंदी हो चुकी है अगर वह सिदक़ दिल से ऐलानिया तौबा करे और हरामकारियों से बाअज रहे तो उसके पीछे नमाज़ पढ़ी जा सकती है।
📚 फतवा फैज़ूर्रसूल, जिस 1, सफ़ा 277
📚गलत फ़हमिया और उनकी इस्लाह, सफ़ा 30
✒✒मिन जानिब :- मेम्बरान इल्म की रौशनी
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