Paaki Ka Talabgaar (Shab E Baraat)

शब ए बरात के फ़ज़ाइल

पाकी का तलबगार


➡️हकीम बिन केसान رحمۃ اللہ علیہ ने फ़रमाया कि अल्लाह तआला ﷻ निस्फ़ (आधा) शाअ्बान की रात अपनी मख़लूक़ की तरफ़ तवजह् फ़रमाता है और जो उस से पाकी का तलबगार होता है उस को पाक फ़रमा देता है। और आइन्दा उसी रात तक पाक रखता है। हज़रत ए अता बिन यसार رحمۃ اللہ علیہ से मरवी है कि निस्फ़ शाअ्बान की रात में तमाम साल के अमुर पेश होते हैं, कुछ लोग सफ़र में जाते हैं और उन का नाम ज़िन्दों से निकाल कर मुर्दों में डाल दिया जाता है। कोई निकाह करता है हालांकि वह भी ज़िन्दों की फ़िहरिस्त से निकाल कर मुर्दों की फ़िहरिस्त में शामिल कर दिया जाता है।

📚ग़ुनियतुत तालिबिन
📚फैज़ान ए शरीअत, शब ए बरात के फ़ज़ाइल, सफ़ा 1046

✒️✒️मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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Paaki Ka Talabgaar
Shab E Baraat Ke Fazail

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