पन्जवक़्ता नमाज़ से ग़फ़लत और वज़ीफ़े पढना कैसा है?
➡️काफ़ी लोग देखे गए कि वो नमाज़ों का ख़्याल नहीं रखते और पढ़ते भी हैं वक़्त निकाल कर जल्दी जल्दी या बे जमाअत के, और वज़ीफ़ों और तसबियों में लगे रहते हैं। उन के वज़ीफ़े उन के मुंह पर मार दिए जाएंगे. क्योंकि जिस के फ़र्ज़ पूरे ना हों उस का कोई नफ़्ल क़बुल नहीं. इस्लाम में सब से बड़ा वज़ीफ़ा और अमल नमाज़ ए बा जमाअत की पाबंदी है. हदीस ए पाक में है कि हज़रत ए उमर رضي الله تعالیٰ عنه ने एक दिन फ़ज्र की नमाज़ में हज़रत ए सुलेमान बिन अबी हशमा رضي الله عنه को नहीं पाया, दिन में बाज़ार को जाते वक़्त उन के घर के पास से गुज़रे तो उन की माँ से पूछा कि आज सुलेमान जमाअत में क्यों नहीं थें? उन की वालिदा ने बताया कि रात भर जाग कर इबादत करते रहे, फ़ज्र की जमाअत के वक़्त नींद आ गई और जमाअत में शरीक होने से रह गए. हज़रत ए उमर رضي الله عنه ने फ़रमाया :- *मेरे नज़दीक सारी रात जाग कर इबादत करने से फ़ज्र की जमाअत में शरीक होना बेहतर है*
📚मिशकात शरीफ़, बाबुल जमाअत, सफ़ा 97
आला हज़रत رضي الله عنه फरमाते हैं :- *जब तक फ़र्ज़ ज़िम्मा पर बाक़ि रहता है कोई नफ़्ल क़बुल नहीं किया जाता।*
📚अल मलफ़ुज़, हिस्सा 1, सफ़ा 77
📚ग़लतफ़हमियाँ और उनकी इस्लाह, सफ़ा 29
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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Panjwaqta Namaz Se Gaflat Aur Wazeefe Padhna Kaisa Hai?
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