क़ब्रिस्तानों में चिराग व मोमबत्ती जलाने और अगरबत्ती या लोबान सुलगाना कैसा है?
➡शब-ए-बरात वग़ैरह के मौक़े पर क़ब्रिस्तानों में चिराग बत्तियां की जाती हैं । इस बारे में यह जान लेना ज़रूरी है कि बिल्कुल ख़ास क़ब्र के ऊपर चिराग व मोमबत्ती जलाना लोबान व अगरबती सुलगाना मना है ।
कब्र से अलाहिदा(अलग) किसी जगह ऐसा करना जाइज़ है। जबकि इन चीज़ो से वहाँ आने जाने और क़ुरआन शरीफ़ और फ़ातिहा वग़ैरह पढ़ने वालों को या राहगीरों को नफा(फ़ायदा) पहुँचने की उम्मीद हो । यह ख़्याल करना कि इस की रौशनी और खुशबू क़ब्र में जो दफन हैं उनको पहुंचेगी जहालत ,नादानी,नावाकिफी और ग़लत फ़हमी है।
दुनिया की रौशनियाँ सजावटें और डेकोरेशन वगैरह क़ब्रिस्तानों में करते हैं और ये सब मुर्दों को नहीं पहुँचती मुर्दों को सिर्फ सवाब ही पहुँचता है । मुर्दा अगर जन्नती हैं तो उसके लिए जन्नत की खुशबू और रौशनी काफी है, और जहन्नमी के लिए न कोई रौशनी है न खुशबू ।
📚सही मुस्लिम, जिल्द 1, सफ़ा 76,
📚फ़तावा रज़विया, जिल्द 4, सफ़ा 141
📚ग़लत फ़हमियाँ और उनकी इस्लाह, सफ़ा 50
✒✒मिन जानिब:- इल्म की रौशनी
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Shab E Baraat Mein Agarbatti Aur Mombatti Jalana
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