क़ुर्बानी का बयान, मसाइल
(पार्ट 12)
3️⃣5️⃣ अय्यामें नहर गुज़र गए और जिस पर क़ुर्बानी वाजिब थी उसने नहीं की है तो क़ुर्बानी फ़ौत हो गई अब नहीं हो सकती फिर अगर उसने कुर्बानी का जानवर मुअय्यन कर रखा है मसलन मुअय्यन जानवर के क़ुर्बानी की मन्नत मान ली है वह शख़्स गनी हो या फक़ीर बहर सूरत उसी मुअय्यन जानवर को ज़िन्दा सदक़ा करे और अगर ज़बह कर डाला तो सारा गोश्त सदक़ा करे उसमें से कुछ न खाए और अगर कुछ खा लिया है तो जितना खाया है उसकी क़ीमत सदका करे और अगर ज़बह किए हुए जानवर की क़ीमत ज़िन्दा जानवर से कुछ कम है तो जितनी कमी है उसे भी सदक़ा करे और फक़ीर ने क़ुर्बानी की नियत से जानवर खरीदा है और क़ुर्बानी के दिन निकल गए चूँकि उस पर भी उसी मुअय्यन जानवर की क़ुर्बानी वाजिब है लिहाज़ा उस जानवर को ज़िन्दा सदक़ा कर दे और अगर ज़बह कर डाला तो वही हुक्म है जो मन्नत में मज़कुर हुआ। यह हुक्म उसी सूरत में है कि क़ुर्बानी ही के लिए खरीदा हो और अगर उसके पास पहले से कोई जानवर था और उसने उसके क़ुर्बानी करने की नियत कर ली या खरीदने के बाद कुर्बानी की नियत की तो उस पर क़ुर्बानी वाजिब न हुई। और गनी ने क़ुर्बानी के लिए जानवर खरीद लिया है तो वही जानवर सदक़ा कर दे और ज़बह कर डाला तो वही हुक्म है, जो मज़कुर हुआ और खरीदा न हो तो बकरी की क़ीमत सदक़ा करे।
3️⃣6️⃣ क़ुर्बानी के दिन गुज़र गए और उसने क़ुर्बानी नहीं की और जानवर या उसकी क़ीमत को सदक़ा भी नहीं किया यहां तक कि दूसरी बक़रईद आ गई अब ये चाहता है कि साल गुज़िशता की क़ुर्बानी की क़ज़ा इस साल कर ले ये नहीं हो सकता ब्लकि अब भी वही हुक्म है कि जानवर या उसकी क़ीमत सदक़ा करे।
📚बहार ए शरीअत, जिल्द 3, हिस्सा 15, सफ़ा 338 - 339
जारी है......
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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Qurbani ka Bayan, Masail Part 12
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