Qurbani Ka Bayan Part 1 (Bahar E Shariat)

क़ुर्बानी का बयान,

 (पार्ट 1)


🌀 मख़सूस जानवर को मख़सूस दिन में बा नियते तक़्क़रुब ज़बह करना क़ुर्बानी है और कभी उस  जानवर को भी उज़हिया और क़ुर्बानी कहते हैं जो ज़बह किया जाता है। क़ुर्बानी हज़रत ए इब्राहीम علیہ السلام की सुन्नत है जो इस उम्मत के लिए बाक़ी रखी गई और नबी ए करीम “ﷺ” को क़ुर्बानी करने का हुक्म दिया गया,
इरशाद फ़रमाया :-
*فصل لربك وانحر*
तर्जमा कन्ज़ुल ईमान :- तुम अपने रब के लिए नमाज़ पढ़ो और क़ुर्बानी करो।

इस के मुतल्लिक़ पहले चन्द अहादीस ज़िक्र की जाती हैं फ़िर फ़िक़ही मसाइल बयान होंगे।

*हदीस शरीफ़ :-*

1️⃣ अबुदाउद, तिर्मीज़ी व इब्ने माजा उम्मुलमौमिनीन हज़रत ए आईशा सिद्दिक़ा رضی اللہ تعالٰی عنہا से रावी कि हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया कि :- यौमे नहर (दसवें ज़िलहिज्जा) में इब्ने आदम का कोई अमल ख़ुदा के नज़दीक ख़ून बहाने (क़ुरबानी करने) से ज़्यादा प्यारा नहीं और वो जानवर क़्यामत के दिन अपने सिंघ और बाल और घरों के साथ आएगा और क़ुर्बानी का ख़ून ज़मीन पर गिरने से क़ब्ल (पहले) ख़ुदा के नज़दीक मक़ामे क़बूल में पहुंच जाता है लिहाज़ा इस को ख़ुश दिली से करो।

2️⃣ तबरानी हज़रत ए इमाम ए हुसैन बिन अली رضی اللہ تعالٰی عنہما से रावी कि हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया :- जिस ने ख़ुशी दिल से तालीबे सवाब हो कर क़ुर्बानी की वो आतिश ए जहन्नम से हिजाब (रोक) हो जाएगी।

3️⃣ तबरानी इब्ने अब्बास رضی اللہ تعالٰی عنہما से रावी कि हुज़ूर “ﷺ” ने इरशाद फ़रमाया :- जो रुपया ईद के दिन क़ुर्बानी में ख़र्च किया गया उस से ज़्यादा कोई रुपया प्यारा नहीं।

4️⃣ इब्ने माजा अबु हुरैरा رضی اللہ تعالٰی عنہ से रावी कि हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया :-  जिस में उसअत (हैसियत) हो और क़ुर्बानी ना करे वो हमारी ईदगाह के क़रीब ना आए।

📚बहार ए शरीअत, जिल्द 3, हिस्सा 15, सफ़ा 327 - 328

जारी है......

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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Qurbani Ka Bayan Part 1 (Bahar E Shariat)

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