क़ुर्बानी का बयान
(पार्ट 4)
1️⃣3️⃣ मुस्लिम व तिर्मीज़ी व निसाइ व इब्ने माजा उम्मुलमौमिनीन उम्मे सलमा رضی اللہ تعالٰی عنہا से रावी कि हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया :- जिस ने जिलहिज्ज का चाँद देख लिया और उस का इरादा क़ुर्बानी करने का है तो जब तक क़ुर्बानी ना कर ले बाल और नाख़ूनों से ना ले यानी ना तरशवाए।
1️⃣4️⃣ तबरानी अब्दुल्लाह बिन मसउद رضی اللہ تعالٰی عنہ से रावी कि हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया :- क़ुर्बानी में गाय सात (7) की तरफ़ से और ऊँट सात (7) की तरफ़ से है।
1️⃣5️⃣ अबुदाऊद व निसाइ व इब्ने माजा मुजाशिअ बिन मसउद رضی اللہ تعالٰی عنہ से रावी कि हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया :- भेड़ का जज़अ (छः "6" महीने का बच्चा) साल भर वाली बकरी के क़ायम मक़ाम है।
1️⃣6️⃣ इमाम अहमद ने रिवायत की कि हुज़ूर ए अक़दस “ﷺ” ने फ़रमाया कि :- अफ़ज़ल क़ुर्बानी वो है जो बा एतबार क़ीमत आला हो और ख़ूब फ़रबा हो।
1️⃣7️⃣ तबरानी इब्ने अब्बास رضی اللہ تعالٰی عنہا से रावी कि हुज़ूर “ﷺ” ने रात में क़ुर्बानी करने से मना फ़रमाया।
1️⃣8️⃣ इमाम अहमद वग़ैरह हज़रत ए अली से रावी कि हुज़ूर ए अक़दस “ﷺ” ने फ़रमाया :- चार (4) क़िस्म के जानवर क़ुर्बानी के लिए दुरुस्त नहीं।
1. काना :- जिस का काना पन ज़ाहिर है, और
2. बीमार :- जिस की बीमारी ज़ाहिर हो, और
3. लंगड़ा :- जिस का लंग ज़ाहिर है, और
4. ऎसा लागर :- जिस की हड्डियों में मग़ज़ ना हो।
उसी की मिस्ल इमाम मालिक व अहमद व तिर्मीज़ी व अबुदाउद व निसाइ व इब्ने माजा व दारमी बराअ बिन आज़िब رضی اللہ تعالٰی عنہ से रावी ।
📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 3, हिस्सा 15, सफ़ा 330 - 331
जारी है.......
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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Qurbani Ka Bayan Part 4
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