क़ुर्बानी का बयान
(पार्ट 5)
1️⃣9️⃣ इमाम अहमद व इब्ने माजा हज़रत ए अली رضی اللہ تعالٰی عنہ से रिवायत करते हैं कि हुज़ूर “ﷺ” ने कान कटे हुए और सींघ टूटे हुए की क़ुर्बानी से मना फ़रमाया।
2️⃣0️⃣ तिर्मीज़ी व अबुदाउद व निसाइ व दारमी हज़रत ए अली رضی اللہ تعالٰی عنہ रावी कि हुज़ूर “ﷺ” ने फ़रमाया कि :- हम जानवरों के कान और आँखें ग़ौर से देख लें और उस की क़ुर्बानी ना करें जिस के कान का अगला हिस्सा कटा हो और ना उस की जिस के कान का पिछला हिस्सा कटा हो ना उस की जिस का कान फटा हो या कान में सूराख़ हो।
2️⃣1️⃣ इमाम बुख़ारी इब्ने उमर رضی اللہ تعالٰی عنھما से रावी कि हुज़ूर “ﷺ” ईदगाह में नहर व ज़बह फ़रमाते थे।
मसाइल ए फ़िक़हिया
क़ुर्बानी कई क़िस्म की है।
1. ग़नी और फ़क़ीर दोनों पर वाजिब,
2. फ़क़ीर पर वाजिब हो ग़नी पर वाजिब ना हो,
3. ग़नी पर वाजिब हो फ़क़ीर पर वाजिब ना हो।
दोनों पर वाजिब हो उस की सूरत ये है कि क़ुर्बानी की मन्नत मानी ये कहा कि अल्लाह عزوجل के लिए मुझ पर बकरी या गाय की क़ुर्बानी करना है या उस बकरी या उस गाय को क़ुर्बानी करना है। फ़क़ीर पर वाजिब हो ग़नी पर ना हो उस की सूरत ये है कि फ़क़ीर ने क़ुर्बानी के लिए जानवर ख़रीदा उस पर उस जानवर की क़ुर्बानी वाजिब है और ग़नी अगर ख़रीदता तो उस ख़रीदने से क़ुर्बानी उस पर वाजिब ना होती। ग़नी पर वाजिब हो फ़क़ीर पर वाजिब ना हो उस की सूरत ये है कि क़ुर्बानी का वजुब ना ख़रीदने से हो, ना मन्नत मानने से ब्लकि ख़ुदा ने जो उसे ज़िन्दा रखा है उस के शुक्रिया में और हज़रत इब्राहीम علیہ الصلاة والسلام की सुन्नत के इहया (सुन्नत ए इब्राहीमी को क़ायम रखने के लिए) में जो क़ुर्बानी वाजिब है वो सिर्फ़ ग़नी पर है।
📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 3, हिस्सा 15, सफ़ा 331
जारी है......
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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