Qurbani Ka Gosht Wa Posht Wagairah Kya Kare, Masail Part 21

क़ुर्बानी का बयान

क़ुर्बानी का गोश्त व पोस्त वग़ैरह क्या करे, मसाइल 

(पार्ट 21)

2️⃣1️⃣ क़ुर्बानी का गोश्त ख़ुद भी खा सकता है और दूसरे शख़्स ग़नी या फ़क़ीर को दे सकता है खिला सकता है बल्कि उसमें से कुछ खा लेना क़ुर्बानी करने वाले के लिए मुस्तहब है। बेहतर ये है कि गोश्त के तीन (3) हिस्से करे एक हिस्सा फ़ुक़रा के लिए और एक हिस्सा दोस्त व अहबाब के लिए और एक हिस्सा अपने घर वालों के लिए, एक तिहाई से कम सदक़ा न करे। और कुल को सदक़ा कर देना भी जायज़ है और कुल घर ही रख ले ये भी जायज़ है। तीन (3) दिन से ज़ायद अपने और घर वालों के खाने के लिए रख लेना भी जायज़ है और बाअज़ हदीसों में जो उसकी मुमानिअत आई है वो मनसुख़ है अगर उस शख़्स के अहल व अयाल बहुत हों और साहिबे उसअत नहीं है तो बेहतर ये है कि सारा गोश्त अपने बाल-बच्चों ही के लिए रख छोड़े।

2️⃣2️⃣ क़ुर्बानी का गोश्त काफ़िर को न दे कि यहाँ के कुफ़्फ़ार हरबी हैं।

2️⃣3️⃣ क़ुर्बानी अगर मन्नत की है तो उसका गोश्त न ख़ुद खा सकता है न अग़निया को खिला सकता है बल्कि उसको सदक़ा कर देना वाजिब है वह मन्नत मानने वाला फ़क़ीर हो या ग़नी दोनों का एक ही हुक्म है कि ख़ुद नहीं खा सकता है न ग़नी को खिला सकता है।

📚 बहार ए शरीअत, जिल्द 3, हिस्सा 15, सफ़ा 345

जारी है.......

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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Qurbani Ka Gosht Wa Posht Wagairah Kya Kare, Masail Part 21 

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