Qurbani Ka Gosht Wa Posht Wagairah Kya Kare, Masail Part 22

क़ुर्बानी का बयान 

क़ुर्बानी का गोश्त व पोस्त वग़ैरह क्या करे, मसाइल 

(पार्ट 22)


2️⃣4️⃣ मय्यत की तरफ़ से क़ुर्बानी की तो उसके गोश्त का भी वही हुक्म है कि ख़ुद खाए दोस्त अहबाब को दे फ़क़ीरों को दे ये ज़रुर नहीं कि सारा गोश्त फ़क़ीरों ही को दे क्योंकि गोश्त उसकी मिल्क है ये सब कुछ कर सकता है और अगर मय्यत ने कह दिया है कि मेरी तरफ़ से क़ुर्बानी कर देना तो उसमें से न खाए बल्कि कुल गोश्त सदक़ा कर दे।

2️⃣5️⃣ क़ुर्बानी का चमड़ा और उसकी झोल (क़ुर्बानी के जानवरों पर डालने वाला कपड़ा) और रस्सी और उसके गले में हार डाला है वो हार उन सब चीज़ों को सदक़ा कर दे। क़ुर्बानी के चमड़े को ख़ुद भी अपने काम में ला सकता है यानी उसको बाक़ी रखते हुए अपने किसी काम में ला सकता है मसलन उसकी जानमाज़ बनाए, चलनी (आटा वग़ैरह छानने का आला, छिलनी) थैली, मशकिज़ा, दस्तरख़्वान, डोल वग़ैरह बनाए या किताबों की जिल्दों में लगाए ये सब कर सकता है। चमड़े का डोल बनाया तो उसे अपने काम में लाए उजरत पर ना दे और अगर उजरत पर दे दिया तो उस उजरत को सदक़ा करे।

2️⃣6️⃣ क़ुर्बानी के चमड़े को ऐसी चीज़ों से बदल सकता है जिस को बाक़ी रखते हुए उस से नफ़अ (फ़ायदा) उठाया जाए जैसे किताब, ऐसी चीज़ से बदल नहीं सकता जिसको हलाक कर के नफ़अ हासिल किया जाता हो जैसे रोटी, गोश्त, सिरका, रुपया, पैसा और अगर उस ने उन चीज़ों को चमड़े के एवज़ में हासिल किया तो उन चीज़ों को सदक़ा कर दे।

📚बहार ए शरीअत, जिल्द 3, हिस्सा 15, सफ़ा 345 - 346

जारी है.......

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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