क़ुर्बानी का बयान
क़ुर्बानी के जानवर का बयान, मसाइल
(पार्ट 14)
1️⃣ क़ुर्बानी के जानवर तीन (3) क़िस्म के हैं।
1. ऊँट,
2. गाय,
3. बकरी
हर क़िस्म में उसकी जितनी नोएं हैं सब दाख़िल हैं नरावर मादा, ख़स्सी (वो जानवर जिस के फ़ोते निकाल दिए गए हों) और ग़ैर ख़स्सी सब का एक हुक्म है यानी सबकी क़ुर्बानी हो सकती है। भैंस गाय में शुमार है उसकी भी क़ुर्बानी हो सकती है। भेड़ और दुम्बा बकरी में दाख़िल हैं उनकी भी क़ुर्बानी हो सकती है।
2️⃣ वहशी जानवर जैसे नील गाय और हिरन उनकी क़ुर्बानी नहीं हो सकती वहशी और घरेलू जानवर से मिलकर बच्चा पैदा हुआ मसलन हिरन और बकरी से उसमें माँ का ऐतबार है यानी उस बच्चे की माँ बकरी है तो जायज़ है और बकरे और हिरनी से पैदा है तो नाजायज़ है।
3️⃣ क़ुर्बानी के जानवर की उम्र ये होनी चाहिए *ऊँट पाँच (5) साल का गाय दो (2) साल की बकरी एक (1) साल की* उससे उम्र कम हो तो क़ुर्बानी जायज़ नहीं ज़्यादा हो तो जायज़ बल्कि अफ़जल है। हाँ दुम्बा या भेड़ का छः(6) माहा बच्चा अगर इतना बड़ा हो कि दूर से देखने में साल भर का मालूम होता हो तो उसकी क़ुर्बानी जायज़ है।
4️⃣ बकरी की क़ीमत और गोश्त अगर गाय के सातवें (7) हिस्सा के बराबर हो तो बकरी अफ़जल है और गाय के सातवें (7) हिस्सा में बकरी से ज़्यादा गोश्त हो तो गाय अफ़जल है यानी जब दोनों की एक ही क़ीमत हो और मिक़दार भी एक ही हो तो जिसका गोश्त अच्छा हो वो अफ़जल है और अगर गोश्त की मिक़दार में फ़र्क़ हो तो जिसमें गोश्त ज़्यादा हो वो अफ़जल है और मेढा भेड़ से और दुम्बा दुम्बी से अफ़ज़ल है जबकि दोनों की एक क़ीमत हो और दोनों में गोश्त बराबर हो। बकरी बकरे से अफ़ज़ल है मगर ख़स्सी बकरा बकरी से अफ़ज़ल है और ऊँटनी ऊँट से और गाय बैल से अफ़ज़ल है जबकि गोश्त और क़ीमत में बराबर हों।
📚बहार ए शरीअत, जिल्द 3, हिस्सा 15, सफ़ा 339 - 340
जारी है......
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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Qurbani Ke Janwar Ka Bayan, Masail Part 14
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