क़ुर्बानी का बयान
क़ुर्बानी के जानवर का बयान, मसाइल
(पार्ट 15)
5️⃣ क़ुर्बानी के जानवर को ऐब से ख़ाली होना चाहिए और थोड़ा सा ऐब हो तो क़ुर्बानी हो जाएगी मगर मकरूह होगी और ज़्यादा ऐब हो तो होगी ही नहीं। जिसके पैदाइशी सींग न हों उसकी क़ुर्बानी जायज है और अगर सींग थे मगर टूट गया और मेंग (जड) तक टूटा है तो नाजायज़ है उससे कम टूटा है तो जायज़ है। जिस जानवर में जुनुन है अगर उस हद का है कि वो जानवर चरता भी नहीं है तो उसकी क़ुर्बानी नाजायज़ है और उस हद का नहीं है तो जायज़ है। ख़स्सी यानी जिसके ख़सिये निकाल लिए गए हैं या महबूब यानी जिसके ख़सिये और अज़ुए तनासुल सब काट लिए गए हों उनकी क़ुर्बानी जायज है। इतना बूढ़ा कि बच्चा के क़ाबिल न रहा या दागा हुआ जानवर या जिसके दूध न उतरता हो उन सब की क़ुर्बानी जायज़ है। खारश्ती जानवर की क़ुर्बानी जायज़ है जबकि फ़रबा (मोटा, सेहतमंद) हो और इतना लागर हो कि हड्डी में मग़ज़ न रहा तो क़ुर्बानी जायज़ नहीं ।
6️⃣ भेंगे जानवर की क़ुर्बानी जायज़ है। अंधे जानवर की क़ुर्बानी जायज़ नहीं और काना जिसका कानापन ज़ाहिर हो उसकी भी क़ुर्बानी नाजायज़। इतना लागर जिसकी हड्डियों में मग़ज़ न हो और लंगड़ा जो क़ुर्बानगाह तक अपने पाँव से न जा सके और इतना बीमार जिसकी बीमारी ज़ाहिर हो और जिसके कान या दूम या चूकि (दुम्बे की गोल चपटी दुम) कटे हों यानी वह अज़ू तिहाई से ज़्यादा कटा हो उन सबकी क़ुर्बानी नाजायज़ है और अगर कान या दूम या चूकि तिहाई या उससे कम कटी हो तो जायज़ है जिस जानवर के पैदाइशी कान न हों या एक कान न हो उसकी नाजायज़ है और जिसके कान छोटे हों उसकी जायज़ है। जिस जानवर की तिहाई से ज़्यादा नज़र जाती रही उसकी भी क़ुर्बानी नाजायज़ है अगर दोनों आँखों की रौशनी कम हो तो उसका पहचानना आसान है और सिर्फ़ एक आँख की कम हो तो उसके पहचानने का तरीक़ा ये है कि जानवर को एक-दो दिन भूखा रखा जाए फ़िर उस आँख पर पट्टी बांध दी जाए जिसकी रौशनी कम है और अच्छी आँख खुली रखी जाए और इतनी दूर चारा रखें जिसको जानवर न देखे फ़िर चारा को नज़दीक लाते जाएं जिस जगह वह चारे को देखने लगे वहां निशान रख दें फ़िर अच्छी आँख पर पट्टी बाँध दें और दूसरी खोल दें और चारा को क़रीब करते जाएं जिस जगह उस आँख से देख ले यहां भी निशान कर दें फिर दोनों जगहों की पैमाईश करें अगर ये जगह उस पहली जगह की तिहाई है तो मालूम हुआ कि तिहाई रौशनी कम है और अगर निस्फ़ है तो मालूम हुआ कि ब निस्बत अच्छी आँख की उसकी रौशनी आधी है।
📚बहार ए शरीअत, जिल्द 3, हिस्सा 15, सफ़ा 340 - 341
जारी है......
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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Qurbani Ke Janwar Ka Bayan, Masail Part 15
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