Qurbani Ke Janwar Ka Bayan, Masail Part 16

क़ुर्बानी का बयान

क़ुर्बानी के जानवर का बयान, मसाइल 

(पार्ट 16)


7️⃣ जिस के दांत ना हों (ऐसा जानवर जो घांस खाने की सलाहियत ना रखता हो, हाँ अलबत्ता अगर घांस खाने की सलाहियत रखता हो तो उस की क़ुर्बानी जायज़ है) या जिस के थन कटे हों या ख़ुशक हों उस की क़ुर्बानी नाजायज़ है बकरी में एक का ख़ुश्क होना नाजायज़ होने के लिए काफ़ी है और गाय भैंस में दो ख़ुश्क हों तो नाजायज़ है। जिस की नाक कटी हो या इलाज के ज़रिया उस का दूध ख़ुश्क कर दिया हो और ख़ुन्शा जानवर यानी जिस में नर व मादा दोनों की अलामतें हों और जिल्लाला जो सिर्फ़ ग़लीज़ खाता हो उन सब की क़ुर्बानी नाजायज़ है।

8️⃣ भेड़ या दूम्बा की ऊन काट ली गई हो उस की क़ुर्बानी जायज़ है और जिस जानवर का एक पांव काट लिया गया हो उस की क़ुर्बानी नाजायज़ है

9️⃣ जानवर को जिस वक़्त ख़रीदा था उस वक़्त उस में ऐसा ऐब ना था जिस की वजह से क़ुर्बानी नाजायज़ होती है बाद में वो ऐब पैदा हो गया तो अगर वो शख़्स मालिक ए निसाब है तो दूसरे जानवर की क़ुर्बानी करे और मालिक ए निसाब नहीं है तो उसी की क़ुर्बानी कर ले ये उस वक़्त है कि उस फ़क़ीर ने पहले से अपने ज़िम्मा क़ुर्बानी वाजिब ना की हो और अगर उस ने मन्नत मानी है कि बकरी की क़ुर्बानी करूँगा और मन्नत पूरी करने के लिए बकरी ख़रीदी उस वक़्त बकरी में ऐसा ऐब ना था फ़िर पैदा हो गया उस सूरत में फ़क़ीर के लिए भी यही हुक्म है कि दूसरे जानवर की क़ुर्बानी करे।


📚बहार ए शरीअत, जिल्द 3, हिस्सा 15, सफ़ा  341 - 342

जारी है......

✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी

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