क़ुर्बानी का बयान
कुर्बानी के जानवर में शिरकत, मसाइल
(पार्ट 19)
1️⃣6️⃣ क़ुर्बानी के सब शुरका की नियत तक़र्रुब (अल्लाह तआला का हक़ अदा करना मक़सूद हो) हो इसका ये मतलब है किसी का इरादा गोश्त न हो और ये ज़रूर नहीं कि वो तक़र्रुब एक ही क़िस्म का हो मसलन सब क़ुर्बानी ही करना चाहते हैं बल्कि अगर मुख़्तलिफ़ क़िस्म के तक़र्रुब हों वो तक़र्रुब सब पर वाजिब हो या किसी पर वाजिब हो और किसी पर वाजिब न हो हर सूरत में क़ुर्बानी जायज़ है मसलन दमे एहसार और एहराम में शिकार करने की जज़ा और सर मुन्डाने की वजह से दम वाजिब हुआ हो और तमतअ व क़ुरआन का दम कि उन सब के साथ क़ुर्बानी की शिरकत हो सकती है। इसी तरह क़ुर्बानी और अक़ीक़ा की भी शिरकत हो सकती है कि अक़ीक़ा भी तक़र्रुब की एक सूरत है।
1️⃣7️⃣ तीन (3) शख़्सों ने क़ुर्बानी के जानवर ख़रीदे एक ने दस (10) का दूसरे ने बीस (20) का तीसरे ने तीस (30) का और हर एक ने जितने में ख़रीदा है उसकी वाजिबी क़ीमत भी उतनी ही है ये तीनों जानवर मिल गए ये पता नहीं चलता कि किसका कौन है तीनों ने ये इत्तेफ़ाक़ कर लिया कि एक एक जानवर हर शख़्स क़ुर्बानी करे चुनान्चे ऐसा ही किया गया सब की क़ुर्बानीयां हो गयीं मगर जिस ने तीस (30) में ख़रीदा था वो बीस (20) रुपए ख़ैरात करे क्योंकि मुमकिन है कि दस वाले को उसने क़ुर्बानी किया हो और जिस ने बीस (20) में ख़रीदा था वो दस रुपए ख़ैरात करे और जिस ने दस में ख़रीदा था उस पर कुछ सदक़ा करना वाजिब नहीं और अगर हर एक ने दूसरे को ज़बह करने की इजाज़त दे दी तो क़ुर्बानी हो जाएगी और उस पर कुछ वाजिब ना होगा।
📚बहार ए शरीअत, जिल्द 3, हिस्सा 15, सफ़ा 343 - 344
जारी है.......
✒️✒️ मिन जानिब :- इल्म की रौशनी
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Qurbani Ke Janwar Mein Shirkat Masail Part 19
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